बीजेपी का दामन 1980 में ही क्यों नहीं थामा था? सुब्रमण्यम स्वामी ने बताई वजह

नई दिल्ली

बीजेपी के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी से कुछ छात्रों ने पूछा कि उन्होंने बीजेपी का दामन तब ही क्यों नहीं थाम लिया था जब 1980 में इसका जन्म हुआ था। अक्सर मोदी सरकार को निशाने पर रखने वाले फायर ब्रॉन्ड नेता ने तफसील से वो वजह बताई जिसकी वजह से वो 2009 में बीजेपी से जुड़े।

सुब्रमण्यम स्वामी का कहना था कि 1980 में जब बीजेपी की स्थापना हुई तो वो जनता पार्टी में थे। वो चाहते तो जनता पार्टी को तोड़कर बीजेपी में शामिल हो सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से गुरेज किया, क्योंकि तब बीजेपी Gandhian Socialism (गांधीवादी समाजवाद) को लेकर आगे बढ़ रही थी। वो इस विचारधारा का समर्थन नहीं करते। उन्हें लगता है कि देश को आगे बढ़ाने में ये उतनी कारगर नहीं रहने वाली।

स्वामी ने बीजेपी का दामन 2009 में थामा। उनका कहना था कि इस साल में बीजेपी ने खुद को पूरी तरह से हिंदुत्व पर केंद्रित कर दिया। तब उनको लगा कि बीजेपी में जाने का वक्त आ गया है। उन्होंने बगैर कुछ सोचे समझे बीजेपी को ज्वाईन कर लिया और अभी तक इसमें बने हुए हैं। ध्यान रहे कि बीजेपी में शामिल होने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वामी को राज्यसभा भेजा था।

पीएम की आलोचना की तो नहीं मिला रास की सीट
स्वामी को प्रखर नेता माना जाता है। गांधी परिवार के खिलाफ उनकी लड़ाई खासी चर्चा का विषय रही है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे नेशनल हेराल्ड मामले को वो ही अदालत तक ले गए। हालांकि मौजूदा दौर में स्वामी का पीएम मोदी से 36 का आंकड़ा चल रहा है। वो पीएम और सरकार की आलोचना का कोई मौका नहीं चूकते। माना जा रहा है कि इसी वजह से बीजेपी ने उनको दोबारा राज्यसभा भेजने से गुरेज किया।

जानते हैं, क्या है गांधीवादी समाजवाद
गांधीवाद महात्मा गांधी के आदर्शों, विश्वासों एवं दर्शन से जुड़े विचारों के संग्रह को कहा जाता है। वो स्वतंत्रता संग्राम के सबसे बड़े नेता थे। यह ऐसे उन सभी विचारों का एक समग्र रूप है, जो गांधीजी ने जीवन पर्यंत जिया था। गांधीवादी दर्शन न केवल राजनीतिक, नैतिक और धार्मिक है, बल्कि पारंपरिक और आधुनिक तथा सरल एवं जटिल भी है। यह कई पश्चिमी प्रभावों का प्रतीक है, जिनको गांधीजी ने उजागर किया था। लेकिन यह प्राचीन भारतीय संस्कृति में निहित है। गांधीजी ने इन विचारधाराओं को विभिन्न प्रेरणादायक स्रोतों जैसे- भगवद्गीता, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, बाइबिल, गोपाल कृष्ण गोखले, टॉलस्टॉय, जॉन रस्किन आदि से विकसित किया।

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