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राजपूतों के ‘सबसे बड़े नेता’ कालवी का निधन, उनकी हुंकार से हिल जाता था बॉलीवुड तक

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जयपुर

राजस्थान में राजपूत समाज के मुख्य स्तंभ लोकेंद्र सिंह कालवी का निधन हो गया। सोमवार को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में उन्हें हार्ट अटैक के बाद भर्ती कराया गया था। इलाके दौरान देर रात उनका निधन हो गया। लोकेन्द्र सिंह कालवी पूर्व केन्द्रीय मंत्री कल्याण सिंह कालवी के पुत्र थे। वे सर्वसमाज के लोगों को साथ लेकर चलते थे। यही कारण था कि सभी समाजों के लोग उनका बड़ा आदर करते थे। गांव के प्रत्येक व्यक्ति से उनका सीधा जुड़ाव था।

​छुआछूत और भेदभाव के कट्टर विरोधी
वे हमेशा छुआछूत और भेदभाव के कट्टर विरोधी थे। लोकेन्द्र कालवी वाल्मिकी समाज के लोगों को भी अपने बराबर बैठाते थे और सभी को सम्मानपूर्व नाम लेकर पुकारते थे। यही वजह है कि सभी समाजों के लोग कालवी साबह को लोग आदरपूर्वक याद करते हैं। लोकेन्द्र सिंह महाराणा प्रताप के वंशज थे और सिसोदिया राजपूत थे।

​गांव के नाम से बनी पहचान
लोकेन्द्र सिंह कालवी नागौर जिले के एक छोटे से गांव कालवी के रहने वाले थे। उनका गांव इतना छोटा है कि आज तक ग्राम पंचायत भी नहीं है। इसके बावजूद भी कालवी गांव को देश प्रदेश में बड़ी पहचान है। वे अपने नाम और जाति के बजाय गांव के नाम से ही जाने जाते थे।

​करणी सेना के जरिए बड़े आंदोलन​
लोकेन्द्र सिंह कालवी ने दो बार चुनाव लड़ा। एक बार नागौर से और दूसरी बार बाड़मेर से। दोनों ही बार वे चुनाव नहीं जीत सके। राजपूत समाज को एकजुट करने के लिए लोकेन्द्र सिंह कालवी ने करणी सेना का गठन किया। करणी सेना के बेनर तले कई आन्दोलन भी किए। इतिहास से छेड़छाड़ पर बॉलीवुड तक को हिला दिया था। आखिर उनके आंदोलन

​समाज को एकजुट करने के लिए बनाया था सामाजिक न्याय मंच
उन्होंने सामाजिक न्याय मंच का गठन किया। इस न्याय मंच के जरिए उन्होंने स्वर्ण समाज के लिए आरक्षण की आवाज उठाई थी। उनका मानना था कि केवल स्वर्ण जाति का होने से किसी गरीब और असहाय व्यक्ति को आरक्षण से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

इतिहास से छेड़छाड़ किए जाने पर उन्होंने मुखर होकर आवाज उठाई​
लोकेन्द्र सिंह कालवी काफी ओजस्वी नेता थे। उनके भाषण में काफी जोश और बड़ा गुस्सा देखा जाता था लेकिन वे हिंसा के खिलाफ थे। फिल्म पद्मावती और जोधा अकबर के दौरान इतिहास से छेड़छाड़ किए जाने पर उन्होंने मुखर होकर आवाज उठाई और बड़े आन्दोलनों का नेतृत्व किया।

​बड़े आन्दोलनों के बावजूद वे हिंसा के खिलाफ
बड़े आन्दोलनों के बावजूद वे हिंसा के खिलाफ थे। उनका कहना था कि किसी भी आन्दोलन से आमजन को परेशानी नहीं होनी चाहिए और ना ही किसी प्रकार की क्षति होनी चाहिए। हिंसा करने पर वे अपने ही समाज के नेताओं को आड़े हाथों लेने से नहीं चूकते थे। लोकेन्द्र सिंह कालवी के दो पुत्र भवानी कालवी और प्रताप कालवी हैं। रिपोर्ट- रामस्वरूप लामरोड़

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