19.6 C
London
Monday, June 15, 2026
Homeराज्यराजपूतों के 'सबसे बड़े नेता' कालवी का निधन, उनकी हुंकार से हिल...

राजपूतों के ‘सबसे बड़े नेता’ कालवी का निधन, उनकी हुंकार से हिल जाता था बॉलीवुड तक

Published on

जयपुर

राजस्थान में राजपूत समाज के मुख्य स्तंभ लोकेंद्र सिंह कालवी का निधन हो गया। सोमवार को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में उन्हें हार्ट अटैक के बाद भर्ती कराया गया था। इलाके दौरान देर रात उनका निधन हो गया। लोकेन्द्र सिंह कालवी पूर्व केन्द्रीय मंत्री कल्याण सिंह कालवी के पुत्र थे। वे सर्वसमाज के लोगों को साथ लेकर चलते थे। यही कारण था कि सभी समाजों के लोग उनका बड़ा आदर करते थे। गांव के प्रत्येक व्यक्ति से उनका सीधा जुड़ाव था।

​छुआछूत और भेदभाव के कट्टर विरोधी
वे हमेशा छुआछूत और भेदभाव के कट्टर विरोधी थे। लोकेन्द्र कालवी वाल्मिकी समाज के लोगों को भी अपने बराबर बैठाते थे और सभी को सम्मानपूर्व नाम लेकर पुकारते थे। यही वजह है कि सभी समाजों के लोग कालवी साबह को लोग आदरपूर्वक याद करते हैं। लोकेन्द्र सिंह महाराणा प्रताप के वंशज थे और सिसोदिया राजपूत थे।

​गांव के नाम से बनी पहचान
लोकेन्द्र सिंह कालवी नागौर जिले के एक छोटे से गांव कालवी के रहने वाले थे। उनका गांव इतना छोटा है कि आज तक ग्राम पंचायत भी नहीं है। इसके बावजूद भी कालवी गांव को देश प्रदेश में बड़ी पहचान है। वे अपने नाम और जाति के बजाय गांव के नाम से ही जाने जाते थे।

​करणी सेना के जरिए बड़े आंदोलन​
लोकेन्द्र सिंह कालवी ने दो बार चुनाव लड़ा। एक बार नागौर से और दूसरी बार बाड़मेर से। दोनों ही बार वे चुनाव नहीं जीत सके। राजपूत समाज को एकजुट करने के लिए लोकेन्द्र सिंह कालवी ने करणी सेना का गठन किया। करणी सेना के बेनर तले कई आन्दोलन भी किए। इतिहास से छेड़छाड़ पर बॉलीवुड तक को हिला दिया था। आखिर उनके आंदोलन

​समाज को एकजुट करने के लिए बनाया था सामाजिक न्याय मंच
उन्होंने सामाजिक न्याय मंच का गठन किया। इस न्याय मंच के जरिए उन्होंने स्वर्ण समाज के लिए आरक्षण की आवाज उठाई थी। उनका मानना था कि केवल स्वर्ण जाति का होने से किसी गरीब और असहाय व्यक्ति को आरक्षण से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

इतिहास से छेड़छाड़ किए जाने पर उन्होंने मुखर होकर आवाज उठाई​
लोकेन्द्र सिंह कालवी काफी ओजस्वी नेता थे। उनके भाषण में काफी जोश और बड़ा गुस्सा देखा जाता था लेकिन वे हिंसा के खिलाफ थे। फिल्म पद्मावती और जोधा अकबर के दौरान इतिहास से छेड़छाड़ किए जाने पर उन्होंने मुखर होकर आवाज उठाई और बड़े आन्दोलनों का नेतृत्व किया।

​बड़े आन्दोलनों के बावजूद वे हिंसा के खिलाफ
बड़े आन्दोलनों के बावजूद वे हिंसा के खिलाफ थे। उनका कहना था कि किसी भी आन्दोलन से आमजन को परेशानी नहीं होनी चाहिए और ना ही किसी प्रकार की क्षति होनी चाहिए। हिंसा करने पर वे अपने ही समाज के नेताओं को आड़े हाथों लेने से नहीं चूकते थे। लोकेन्द्र सिंह कालवी के दो पुत्र भवानी कालवी और प्रताप कालवी हैं। रिपोर्ट- रामस्वरूप लामरोड़

Latest articles

भारत-स्लोवाकिया के बीच कई अहम समझौते, पीएम मोदी बोले- टेक्नोलॉजी हमारे संबंधों का आधार

ब्रातिस्लावा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके स्लोवाकियाई समकक्ष रॉबर्ट फिचो के बीच...

मप्र में बनेगा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- डेटा सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती

भोपाल। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों और डेटा सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने...

मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां तेज, भोपाल समेत 30 जिलों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले मौसम ने पूरी तरह करवट...

मुरैना में मोबाइल फटने से फैली ट्रेन में आग की अफवाह, रेल से कूदे चार यात्री दूसरी गाड़ी से कट गए

मुरैना। प्रदेश के मुरैना जिले के हेतमपुर और राजस्थान के धौलपुर रेल खंड के...

More like this

जशपुर पहली बार मिलेगा रेल नेटवर्क से जुड़ाव, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना अधिसूचित

जशपुर। जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। भारत...

मुख्यमंत्री जन आवास योजना के 110 लाभार्थियों को मिली घर की चाबी

जयपुर। मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत आयोजित “गृह गौरव : खुशियों की चाबी”...

2027 चुनाव में भगवंत मान होंगे आप का सीएम चेहरा, बठिंडा में केजरीवाल ने किया ऐलान

बठिंडा। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027...