कूनो में 3 चीतों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट को हुई च‍िंता, केंद्र सरकार ने सबसे बड़ी अदालत से छ‍िपा ली एक बात

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 3 चीतों के मौत पर गहरी चिंता जाहिर की और केंद्र सरकार को सलाह दी कि राजनीति से ऊपर उठकर कूनो से कुछ चीतों को राजस्थान शिफ्ट करने पर विचार किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की बेंच कहा कि ऐसा लगता है कि इतने सारे चीतों के लिए कूनो पर्याप्त नहीं है। क्यों नहीं आप राजस्थान में कोई अच्छी जगह ढूंढते हैं? सिर्फ इसलिए कि राजस्थान में विपक्षी दल की सत्ता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इस प्रस्ताव पर विचार न करें।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से क्या जानकारी छिपाई?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने उच्चतम न्यायालय के सवाल पर कहा कि सभी संभावनाओं पर गौर किया जा रहा है। हालांकि दौरान केंद्र सरकार ने यह जानकारी ही नहीं दी की राजस्थान सरकार खुद ऐसा प्रस्ताव दे चुकी है।

जुलाई 2020 में जिस वक्त नामीबिया के साथ चीतों को भारत लाने के लिए एमओयू पर साइन हुआ था, उसके ठीक बाद ही 8 अगस्त 2020 को राजस्थान के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) को एक पत्र लिखा था और कुछ चीतों को मुकुंदरा में लाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था।

NTCA ने 24 अगस्त 2020 को अपने जवाब में लिखा था कि टाइगर रिजर्व के उद्देश्य अलग हैं। बाघों की आबादी बढ़ाने का प्रयास जारी है। ऐसे में इस समय मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाने के प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।

NTCA से कुछ चीतों को शिफ्ट करने का अनुरोध
कूनों में एक के बाद एक चीतों की मौत के बीच मध्य प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कंफर्म किया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान एनटीसीए से कई बार कुछ चीतों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का अनुरोध किया गया। चौहान कहते हैं कि कूनों में जगह की कमी तो है ही। साथ ही लॉजिस्टिक्स भी एक बड़ी समस्या है।

उधर, मध्य प्रदेश फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के भोपाल में बैठने वाले एक सीनियर अफसर ने कहा कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में तत्काल कुछ चितों को शिफ्ट किया जा सकता है। यहां (मध्य प्रदेश में) हम गांधी सागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को चीतों के लिए तैयार कर रहे हैं, लेकिन इसमें कम से कम एक साल का और वक्त लगेगा।

राजस्थान जाने की इच्छुक नहीं थी टीम
इंडियन एक्सप्रेस ने इस संबंध में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के सदस्य सचिव एसपी यादव से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीता टीम ने एक बार राजस्थान को ना कह दिया था, इसके बाद वहां जाने के लिए कतई इच्छुक नहीं थे।

तो क्या राजस्थान में चल रही तैयारी?
राजस्थान के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरिंदम तोमर से जब पूछा गया कि क्या NTCA से हाल-फिलहाल में चीतों को राजस्थान शिफ्ट करने के संबंध में कोई बातचीत हुई है? तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। हां, एनटीसीए के सामने वाइल्ड डॉग्स और गौर (इंडियन बायसन) को मुकुंदरा टाइगर रिजर्व लाने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

आपको बता दें कि मुकुंदरा को साल 2013 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था और साल 2018 में यहां रणथंभौर से पहली बार टाइगर लाए गए थे। 82 स्क्वायर किलोमीटर में फैले इस टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों में 4 वयस्क टाइगर और तीन शावक का निधन हो चुका है। इसके बावजूद यह पार्क अभी भी सरकार के चीता एक्शन प्लान के रडार पर है।

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