पटना
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को जब से बजट 2024 का भाषण लोकसभा में पढ़ा है तब से मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की हो रही है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों के नेता इस आम बजट को बिहार का बजट तक बता रहे हैं। तमाम अखबारों, न्यूज चैनलों में बिहार को लेकर दिख रही हेडलाइंस को देखकर ऐसा लग रहा है मानो महज कुछ साल में बिहार देश का नंबर वन राज्य बनने जा रहा है। जीतन राम मांझी, विजय चौधरी, गिरिराज सिंह, चिराग पासवान, सम्राट चौधरी सरीखे बिहार एनडीए घटक के तमाम नेता डिक्शनरी से अच्छे अच्छे शब्द चुनकर पिछले 24 घंटे से अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बजट की तारीफ करने में जुटे हैं। इन तमाम अच्छी चर्चाओं के बीच बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने राजनीतिक कर्तव्य के अनुरूप इस बिहार के लिए हुई घोषणाओं पर सवाल उठा रहे हैं। तेजस्वी यादव बिहार के लिए 60 हजार करोड़ की घोषणाओं को केवल छलावा बताने में जुटे हैं। ऐसे में बिहार की 13 करोड़ जनता समेत देश के तमाम लोगों के जेहन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हम इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। प्रयास यह है कि तेजस्वी यादव के आरोपों में कितनी सच्चाई है। इसलिए स्टेप बाई स्टेप वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बिहार के लिए की गई तमाम घोषणाओं का विश्लेषण करते हैं।
1. वित्त मंत्री ने भागलपुर के पीरपैंती में 2400 मेगावाट के नये पावर प्लांट बनाने की घोषणा की। इसके लिए 21 हजार 400 करोड़ रुपये आवंटन की बात कही गई। अब यहां आपको बता दें कि पीरपैंती में पावर प्लांट बनाने की घोषणा 2014 में हो गई थी। फरवरी 2014 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में पीरपैंती पावर प्लांट बनाने की घोषणा हुई थी। NTPC का यह प्रोजेक्ट प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाने की घोषणा हुई थी। उस वक्त के समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई थी कि NTPC बिहार सरकार के साथ मिलकर राज्य में तीन जगहों भागलपुर के पीरपैंती, बक्सर के चौसा और लखीसराय के कजरा में पावर प्लांट स्थापित करेगी। उसके बाद 30 जनवरी 2024 को राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भागलपुर के पीरपैंती में 2000 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट बनाने का प्रस्ताव भेजा गया जिसपर केंद्र ने सहमती दी थी। यानी 2014 से 2024 तक पीरपैंती पावर प्लांट को लेकर केवल ऐलान ही हो रहा है।
2. बजट भाषण में कहा गया कि बिहार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में आपदाओं से निपटने के लिए मल्टीलेटरल डेवलपमेंट असिस्टेंट की बात कही गई है। यानी सरकार अपने बजट से सीधे कोई रकम नहीं देगी। एशियन डेवलपमेंट बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं से सपोर्ट दिलवाएगी। अगर बिहार सरकार अपने राज्य के विकास के लिए रकम चाहेगा तो उसे केंद्र सरकार ऐसी किसी संस्था से लोन दिलाने में मदद करेगी। यहां सवाल उठता है कि क्या अब तक केंद्र सरकार बिहार या किसी दूसरे राज्य को लोन लेने में मदद नहीं करती हैं। दूसरा सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार केवल बिहार को ही लोन लेने में मदद करेगी।
हमारे कार्यकाल में स्वीकृत, प्रस्तावित, आवंटित, निर्धारित एवं क्रियाशील पुराने प्रॉजेक्ट्स तथा सड़क व पुल निर्माण, पर्यटन, उद्योग व एयरपोर्ट संचालन संबंधित योजनाओं की रीपैकिजिंग कर आज बजट में उसे विशेष पैकेज और विशेष सौग़ात का नाम देकर बिहारवासियों की आँखों में धूल झोंका जा रहा है। 𝟐𝟎𝟏𝟓 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने बिहार के लिए 𝟏 लाख 𝟔𝟓 हजार करोड़ के विशेष पैकेज की घोषणा की थी लेकिन 𝟗 वर्षों बाद भी बिहार को कुछ नहीं मिला। यह बात मैं ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी भी कई बार स्वीकार कर चुके है। जैसे वह घोषणा थी वैसे ही यह है। जुमला पार्टी पुरानी योजनाओं को नया बताने की अपनी विशेष विशेषज्ञता का विशिष्ट प्रदर्शन कर जनता को फिर एक बार भ्रमित कर रही है। 𝟐𝟎𝟏𝟒 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था, उस वादे का क्या हुआ?
तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधानसभा
3. वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि बिहार में हवाई अड्डे बनाने और नये कॉलेज खोले जाने में सहायता की जाएगी। यहां याद दिला दें कि 18 अगस्त 2015 को सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि 2700 करोड़ की लागत से बिहार में एयरपोर्ट का विकास होगा, जिसमें पटना में नया एयरपोर्ट बनेगा। पूर्णिया, रक्सौल और गया में एयरपोर्ट का विकास होगा। फरवरी 2024 में रक्सौल के डीएम ने एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए निरीक्षण करने पहुंचे थे। यानी नौ साल में रक्सौल में एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण तक नहीं हो पाया। पूर्णिया में आज तक एयरपोर्ट का पता नहीं। फरवरी 2024 में बीजेपी के विधायक विजय खेमका ने बिहार विधानसभा में पूर्णिया एयरपोर्ट का मुद्दा सदन में उठाया था। यहां बता दें कि पूर्णिया एयरपोर्ट तकनीकी पेच में उलझा हुआ है। हालांकि गृहमंत्री अमित शाह अपने भाषण में पूर्णिया में ना केवल एयरपोर्ट बनवा चुके हैं, बल्कि वहां से हवाई सेवा भी शुरू करवा चुके हैं। डेढ़ साल पहले पूर्णिया की रैली में अमित शाह ने कहा था कि पूर्णिया में हवाई अड्डा बन गया, लगभग 12 जिले के लोगों को फ्लाइट लेने के लिए पटना या बागडोगरा नहीं जाना होगा। यहां से सस्ते हवाई जहाज में बैठकर दिल्ली-मुंबई जा सकेंगे। इतना ही नहीं अमित शाह ने जो एयरपोर्ट बना नहीं उसके लिए उन्होंने मंच से लोगों से तालियां भी बजवा दी। 2016 में उड़ान योजना लॉन्च हुई थी, जिसके तहत बिहार के 14 जिलों में एयरपोर्ट बनना है। इसी साल 22 जुलाई को राज्य सभा में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडु ने कहा था कि कुछ एयरपोर्ट की बिडिंग हुई है। यानी टेंडर वगैरह की प्रक्रिया हुई होगी। लेकिन बिहार सरकार ने जमीन के इस्तेमाल की अुनमति नहीं दी है।
4. वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि बिहार में मेडिकल कॉलेजों के बनाने में मदद की जाएगी। उन्होंने यह घोषणा कुछ शब्दों में समेट दिया। इससे लोगों के मन में कंफ्यूजन यह है कि बिहार के किन शहरों में मेडिकल कॉलेज बनेगा। यहां लोग पूछ रहे हैं कि दरभंगा एम्स की घोषणा हुए इतने साल हो गए, लेकिन आज तक धरातल पर नहीं उतरा। दरभंगा एम्स की मंजूरी 2020 में ही मिल चुकी है। यहां जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी मेडिकल कॉलेज का निर्माण प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के बजट से तैयार होते हैं। 2023-24 में इसका बजट 3 हजार 365 करोड़ रुपये था, लेकिन रिवाइज बजट 1900 करोड़ का हो गया। यानी मेडिकल कॉलेज बनाने के बजट में 43 फीसदी की कमी कर दी गई।
5. निर्मला सीतारमण की ओर से बजट में बिहार चार नए एक्सप्रेस-वे बनाने के प्रस्ताव दिए हैं। आम बजट में बिहार में सड़क प्रोजेक्ट के लिए 26 हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की गई है। केंद्र सरकार ने पटना से पूर्णिया के बीच एक्सप्रेस वे बनाने के लिए फंड देने का ऐलान किया। इसके अलावा बक्सर से भागलपुर के बीच हाईवे बनाया जाएगा। साथ ही बोधगया से राजगीर, वैशाली होते हुए दरभंगा तक हाईवे बनेगा। बक्सर में गंगा नदी पर दो लेन का एक पुल भी बनाया जाएगा। पड़ताल करने पर पता चलात है कि यह प्रोजेक्ट भी पुराना है। अगस्त 2023 में बिहार के तत्कालीन डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी। इसके बाद ट्वीट कर घोषणा की थी कि बक्सर से भागलपुर तक एक्सप्रेसवे बनाने, पटना में गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर पुल बनाने, पटना-कोइलवर और अनीसाबाद-दीदारगंज के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर, केंद्र सरकार की लंबे अर्से से लंबित परियोजनाओं को पूरा करना, पटना-गया और हाजीपुर-छपरा रोड प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करना, महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया NH और मुजफ्फररपुर बाइपास बनाने को लेकर चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद नितिन गडकरी का भी बयान आया था कि पहली बार बिहार का कोई नेता उनसे कुछ मांगने आया था, जिसे वह जरूर पूरा करेंगे।
इसके अलावा बजट भाषण में पटना से पूर्णिया एक्सप्रेस वे बनाने की घोषणा की गई। यहां बता दें कि जिस पटना पूर्णिया एक्सप्रेसवे की डीपीआर के लिए 2022 में ही NHAI ने टेंडर मंगाया था और 300 दिन के भीतर काम शुरू करने की डेडलाइन तय की थी। 2023 तक डीपीआर तैयार होने और काम शुरू की बात तय हुई थी। अब 2024 के बजट भाषण में एक बार फिर से इसकी घोषणा की गई है।
6. बजट भाषण में घोषणा की गई कि नालंदा, राजगीर और बोधगया जैसे बिहार के पर्यटन प्राचीन स्थलों का विकास किया जाएगा। गया के विष्णुपद मंदिर और बोधगया के महाबोधि मंदिर को विश्वस्तरीय तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के मॉडल के अनुरूप विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर के निर्माण के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। यहां बता दें कि करीब एक साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही घोषणा की थी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर महाबोधि कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। पूरे इलाके को लाल और गुलाबी पत्थरों और ग्रीनबेल्ट से सजाया जाएगा।
7. इसके अलावा गया में औद्योगिक कॉरिडोर बनाने की घोषणा हुई है। यह घोषणा भी पुराना है। गया में 1670 एकड़ में राज्य का पहला औद्योगिक कॉरिडोर बनाने का ऐलान करीब एक साल पहले खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर चुके हैं। मई 2023 में डोभी के गमहरिया गांव में तकरीबन 475 एकड़ सरकारी जमीन विभाग को ट्रांसफर करने की खबर सामने आई थी। बाकी जमीन पर भू-अर्जन का काम तेजी से करने का दावा किया गया था। उम्मीद जताई गई थी एक दो महीने में भू-अर्जन का काम पूरा होने के बाद इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की प्रकिया शुरू हो जाएगी।
इन घोषणाओं से क्या पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे नीतीश कुमार!
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में बिहार को लेकर की गई घोषणाओं को लेकर जिस तरह से बिहार के मुख्यमंत्री का बयान गौर करने लायक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विशेष राज्य के दर्जे की डिमांड की जा रही थी, लेकिन वह प्रथा पहले से ही बंद कर दिया गया है। उसके लिए एक सहायता के लिए बिहार के विकास के लिए मदद होना चाहिए। वह मदद करना शुरू कर दिया गया है। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या आप बजट भाषण से खुश हैं तो उन्होंने इसपर स्पष्ट कुछ भी कहने के बजाय यह कह दिया कि हां भाई इसपर क्या कहें। सीएम ने कहा कि सारा काम तो हो ही रहा है, लेकिन अगर केंद्र उसमें और मदद कर रहा है तो अच्छी बात है। सीएम की इस लाइन से स्पष्ट है कि वह भी स्वीकार रहे हैं कि बजट भाषण में हुई ज्यादातर घोषणाओं पर पहले से काम हो रहा है। सीएम नीतीश ने बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की डिमांड को बंद करने के सवाल पर भी स्पष्ट तौर से कुछ भी नहीं कहा है।
