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दिल्ली सरकार में आएगी नौकरियों की बहार, कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स वाले पदों पर होंगी स्थायी नियुक्तियां

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नई दिल्ली:

दिल्ली सरकार की तरफ से जल्द ही अपने विभागों में पक्की नौकरियां दी जाएंगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने अपने सभी विभागों को अपने कार्यालयों में काम करने वाले कॉन्ट्रेक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार ने विभागों को इन पदों को स्थायी कर्मचारियों को काम पर रखकर पदों को भरने की योजना बनाने के लिए भी कहा गया है। सेवा विभाग ने विभाग प्रमुखों, स्थानीय और स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के साथ संवाद किया है, जिसमें एक विशिष्ट प्रोफार्मा का उपयोग करके विभिन्न संवर्गों और ग्रेड में अस्थायी श्रमिकों का विवरण मांगा गया है।

22 हजार पदों पर होगी नियुक्ति
अधिकारियों ने कहा है कि लगभग 22,000 पद हैं जिन्हें दिल्ली सरकार अगले कुछ वर्षों में भरने का इरादा रखती है। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमने विभागों के प्रमुखों को सभी जिला और शाखा कार्यालयों, अस्पतालों और क्लीनिकों से जानकारी इकट्ठा करने की जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दिया है। उन्हें निर्दिष्ट प्रारूप में डेटा की जांच और संकलन करना है और इसे जल्द से जल्द सेवा विभाग के साथ शेयर करना है।’

कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारियों को पक्की नौकरी
अधिकारी ने कहा, ‘हम एक उचित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से अस्थायी और संविदा कर्मचारियों को बदलेंगे। कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा।’ पिछले अठारह महीनों के दौरान, दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों में 22,000 से अधिक स्थायी भर्तियां की गईं। मई 2022 और मई 2023 के बीच, शिक्षा विभाग ने 15,367 पदों को भरा, जबकि NDMC ने केंद्र सरकार की सहायता से लगभग 4,500 व्यक्तियों की भर्ती की। इसके अतिरिक्त, UPSC के माध्यम से 324 प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य के पद भरे गए।

स्थायी नियुक्तियों पर LG का जोर
अधिकारी ने यह भी बताया कि दिल्ली फायर सर्विस में 500 पद और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में 50 से अधिक पदों के साथ-साथ DTC और श्रम विभाग में पद भरे गए। राज निवास के एक अधिकारी ने कहा, ‘उपराज्यपाल वीके सक्सेना एडहॉक और कॉन्ट्रैक्ट भर्ती के बजाय स्थायी नियुक्तियों के महत्व पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह की प्रथाओं से पक्षपात, भ्रष्टाचार और नौकरी पाने वाले नागरिकों का शोषण होता है।’ सेवा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और समय पर परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं। परिणाम घोषित करने में लगने वाला समय भी पिछले 12 महीनों की तुलना में काफी कम होकर 6-8 महीने हो गया है।

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