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कर्नाटक से दिल्ली जा रहे किसानों को भोपाल पुलिस ने हिरासत में लिया, CM सिद्धारमैया भड़के

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भोपाल ,

कर्नाटक से दिल्ली जा रहे किसानों को पुलिस ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में उताकर हिरासत में ले लिया है. आंदोलन में शामिल होने के लिए निकले किसान ट्रेन में अयोध्या जाने का बोलकर बैठे थे. इसी बीच इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के आधार पर देर रात एमपी पुलिस ने उन्हें भोपाल स्टेशन पर उतार लिया.

दरअसल, राजधानी नई दिल्ली में 13 फरवरी से शुरू किसान आंदोलन हो रहा है. ऐसे में कर्नाटक एक्सप्रेस से राष्ट्रीय राजधानी के लिए निकले किसानों को भोपाल रेलवे स्टेशन पर रोक लिया गया. करीब 66 किसानों को भोपाल रेलवे स्टेशन पर उतारकर पुलिस नजदीक स्थित चांदबढ़ इलाके के एक मैरिज हॉल में रखा है. aajtak के पहुंचने पर हिरासत में लिए गए किसानों ने छत से नारेबाजी शुरू कर दी.

भोपाल पुलिस के डीसीपी जोन-1 का कहना है कि नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के प्रदर्शन और आंदोलन पर निषेधाज्ञा को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक के कुछ प्रदर्शनकारियों को भोपाल रेलवे स्टेशन पर विनम्रतापूर्वक रोका गया है. इस दौरान कोई अनुचित व्यवहार या बल प्रयोग नहीं हुआ. सभी प्रदर्शनकारी सुरक्षित हैं और उन्हें जरूरी सुविधाएं मुहैया करा दी गई हैं.

CM सिद्धारमैया ने MP और केंद्र सरकार को घेरा
कर्नाटक के किसानों को हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मध्य प्रदेश सरकार की निंदा की है. साथ ही सभी किसानों को तुरंत रिहा करने की मांग की है. सीएम सिद्धारमैया ने एक बयान जारी करके कहा, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हुबली के किसानों की गिरफ्तारी अत्यधिक निंदनीय है. मैं मांग करता हूं कि मध्य प्रदेश सरकार हमारे राज्य के गिरफ्तार किए गए सभी किसानों को तुरंत रिहा करे और उन्हें कल दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अनुमति दे. हालांकि, गिरफ्तारियां मध्य प्रदेश सरकार ने की हैं, लेकिन यह साफ है कि इस कृत्य के पीछे आपराधिक दिमाग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भाजपा सरकार है.

किसानों की मांगों को पूरा करना चाहिए
उन्हें गिरफ्तार कर डराने-धमकाने से किसानों के संघर्ष को दबाया नहीं जा सकता. इस तरह के दमन से और अधिक किसान सड़कों पर उतर सकते हैं, लेकिन धरती के बेटे-बेटियों का संघर्ष बंद नहीं होगा. अगर केंद्र सरकार वास्तव में शांति और व्यवस्था की परवाह करती है, तो उसे तुरंत किसानों की मांगों को पूरा करना चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए, न कि उन पर दमन और क्रूरता करके उन्हें चुप कराना चाहिए.

चाहे वह केंद्र में हो या राज्यों में, जब भी भाजपा सत्ता में आती है, इतिहास गवाह है कि उनकी आक्रामकता का पहला कदम किसानों के खिलाफ होता है. जब पहली बार भाजपा कर्नाटक में सत्ता में आई, तो बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार ने उर्वरक मांगने वाले किसानों पर बेरहमी से गोली चला दी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारी किसानों पर की गई हिंसा के कारण कई किसानों की मौत हो गई. नरेंद्र मोदी सरकार के वर्तमान कार्यों को देखकर ऐसा लगता है कि उनका मुख्य उद्देश्य किसानों को डरा-धमका कर समर्पण करना है.

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