11 C
London
Friday, March 20, 2026
Homeराष्ट्रीयग्रीस के तौर पर यूरोप में भारत को मिला नया दोस्त, जानें...

ग्रीस के तौर पर यूरोप में भारत को मिला नया दोस्त, जानें भारत के लिए क्यों जरूरी है ये देश

Published on

एथेंस/नई दिल्‍ली:

ग्रीस के प्रधानमंत्री क्‍यरिआकोस मित्‍सोटाकिस मंगलवार देर रात दो दिन के दौरे पर भारत पहुंचे हैं। 2008 के बाद पहली बार ग्रीस का कोई प्रधानमंत्री भारत आया है। बुधवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात करते हुए स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने जमकर एक-दूसरे की तारीफ की और संबंधों की बेहतरी के लिए काम करने का भरोसा दिलाया। दोनों ओर से आए बयानों के बाद कहा जा रहा है कि यूरोप में भारत को एक नया सहयोगी मिल गया है। इससे भू-राजनीतिक रूप से भारत को फायदा होगा और तुर्की जैसे प्रतिद्वंद्वियों को अलग-थलग करने में मदद मिलेगी।

ग्रीस के प्रधानमंत्री के आने से पहले पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रीस का दौरा किया था। यह 40 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधान मंत्री की पहली यात्रा थी। इसके बाद से लगातार दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूती मिली है। ग्रीस भारत के लिए काफी ज्यादा अहमियत रखता है। इसकी सबसे अहम वजह भूमध्य सागर है। ग्रीस भूमध्य सागर की सीमा से लगी प्रमुख समुद्री शक्तियों में से एक है। भूमध्य सागर वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है क्योंकि यह यूरोप और अमेरिका को भारत, चीन और जापान जैसी अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ने में मदद करता है। वैश्विक समुद्री यातायात का 15% भूमध्य सागर से होकर गुजरता है। रूस, अमेरिका और फ्रांस इस क्षेत्र में मजबूत सैन्य उपस्थिति बनाए हुए हैं। चीन ने भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाया है। इसे देखते हुए भारत भी इस क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ग्रीस की भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा परियोजना में भी बेहद अहम भूमिका रहेगी।

तुर्की और सेंट्रल यूरोप को साधना
भारत का तुर्की के साथ एक जटिल रिश्ता है, जो क्षेत्र की एक बड़ी शक्ति है। इसकी वजह तुर्की की पाकिस्तान से नजदीकी और भारत की कश्मीर नीति का विरोध भी है। ग्रीस का तुर्की के साथ भी संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। समुद्री सीमाओं और ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर ग्रीस का तुर्की से टकराव रहा है। तुर्की के लिए अविश्वास भारत और ग्रीस को करीब ला सकता है।

तुर्की के अलावा मध्य यूरोप पर भी भारत की निगाह है। ग्रीस के साथ काम करके भारत मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों को एक संकेत भेज सकता है कि वे उस तक पहुंच सकते हैं। यूरोप के कई देशों के विदेश मंत्री भी रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं। यह आने वाली चीजों का संकेत हो सकता है। विशेष रूप से इस क्षेत्र में पोलैंड और चेक गणराज्य जैसे महत्वपूर्ण देशों की उपस्थिति को देखते हुए ग्रीस और भारत के ये रिश्ते अहम हो जाते हैं।

Latest articles

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...

भक्ति और उत्साह के साथ नव संवत्सर 2083 का आगाज: भेल में स्थापित हुई प्रदेश की सबसे ऊंची 31 फीट की गुड़ी

भोपाल राजधानी में गुरुवार को भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 और चैत्र नवरात्रि का पर्व...

गैस संकट से भोपाल के उद्योग बेहाल: उत्पादन 40% तक घटा, सैकड़ों यूनिट बंद होने की कगार पर

भोपाल मप्र के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लिक्विफाइड नेचुरल गैस और कमर्शियल एलपीजी की भारी...

जल पाइपलाइन कार्य में देरी पर बवाल, पार्षद प्रतिनिधि ने सुपरवाइजर के चेहरे पर पोती कालिख

भोपाल भोपाल के बैरसिया में अमृत 2.0 जलप्रदाय योजना के तहत पाइप लाइन बिछाने के...

More like this

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...

भेल के निदेशक कृष्ण कुमार ठाकुर कार्यमुक्त, अब एनएमडीसी में संभालेंगे नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली | सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में एक...

भेल की बोर्ड बैठक में बड़ा फैसला: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रखरखाव के लिए टिटागढ़ रेल के साथ बनेगा नया जॉइंट वेंचर

नई दिल्ली | देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनी, भारत हैवी...