19.7 C
London
Saturday, May 2, 2026
Homeराष्ट्रीयग्रीस के तौर पर यूरोप में भारत को मिला नया दोस्त, जानें...

ग्रीस के तौर पर यूरोप में भारत को मिला नया दोस्त, जानें भारत के लिए क्यों जरूरी है ये देश

Published on

एथेंस/नई दिल्‍ली:

ग्रीस के प्रधानमंत्री क्‍यरिआकोस मित्‍सोटाकिस मंगलवार देर रात दो दिन के दौरे पर भारत पहुंचे हैं। 2008 के बाद पहली बार ग्रीस का कोई प्रधानमंत्री भारत आया है। बुधवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात करते हुए स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने जमकर एक-दूसरे की तारीफ की और संबंधों की बेहतरी के लिए काम करने का भरोसा दिलाया। दोनों ओर से आए बयानों के बाद कहा जा रहा है कि यूरोप में भारत को एक नया सहयोगी मिल गया है। इससे भू-राजनीतिक रूप से भारत को फायदा होगा और तुर्की जैसे प्रतिद्वंद्वियों को अलग-थलग करने में मदद मिलेगी।

ग्रीस के प्रधानमंत्री के आने से पहले पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रीस का दौरा किया था। यह 40 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधान मंत्री की पहली यात्रा थी। इसके बाद से लगातार दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूती मिली है। ग्रीस भारत के लिए काफी ज्यादा अहमियत रखता है। इसकी सबसे अहम वजह भूमध्य सागर है। ग्रीस भूमध्य सागर की सीमा से लगी प्रमुख समुद्री शक्तियों में से एक है। भूमध्य सागर वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है क्योंकि यह यूरोप और अमेरिका को भारत, चीन और जापान जैसी अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ने में मदद करता है। वैश्विक समुद्री यातायात का 15% भूमध्य सागर से होकर गुजरता है। रूस, अमेरिका और फ्रांस इस क्षेत्र में मजबूत सैन्य उपस्थिति बनाए हुए हैं। चीन ने भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाया है। इसे देखते हुए भारत भी इस क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ग्रीस की भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा परियोजना में भी बेहद अहम भूमिका रहेगी।

तुर्की और सेंट्रल यूरोप को साधना
भारत का तुर्की के साथ एक जटिल रिश्ता है, जो क्षेत्र की एक बड़ी शक्ति है। इसकी वजह तुर्की की पाकिस्तान से नजदीकी और भारत की कश्मीर नीति का विरोध भी है। ग्रीस का तुर्की के साथ भी संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। समुद्री सीमाओं और ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर ग्रीस का तुर्की से टकराव रहा है। तुर्की के लिए अविश्वास भारत और ग्रीस को करीब ला सकता है।

तुर्की के अलावा मध्य यूरोप पर भी भारत की निगाह है। ग्रीस के साथ काम करके भारत मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों को एक संकेत भेज सकता है कि वे उस तक पहुंच सकते हैं। यूरोप के कई देशों के विदेश मंत्री भी रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं। यह आने वाली चीजों का संकेत हो सकता है। विशेष रूप से इस क्षेत्र में पोलैंड और चेक गणराज्य जैसे महत्वपूर्ण देशों की उपस्थिति को देखते हुए ग्रीस और भारत के ये रिश्ते अहम हो जाते हैं।

Latest articles

मप्र के कई जिलों में बारिश, रायसेन में वेयरहाउस की छत उड़ी, सीहोर में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रखी फसल भीगी

बालाघाट में पेड़ गिरने से बाइक दबी भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के दौर...

बरगी क्रूज हादसे में सीएम की बड़ी कार्रवाई, पायलट समेत 3 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त, मैनेजर निलंबित

भोपाल। बरगी जलाशय में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई...

‘बगिया के विष्णु’ का विकास विज़न : सुशासन से जन-जन तक पहुँचती सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते लगभग ढाई वर्षों में शासन की कार्यशैली ने विकास की...

जनगणना 2027 का महा-अभियान शुरू: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वयं भरी अपनी जानकारी, नागरिकों से की खास अपील

जयपुर। राजस्थान में 'जनगणना 2027' के पहले चरण 'मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना'...

More like this

बंगाल में 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा सरकार, असम में BJP, तमिलनाडु में DMK की वापसी

केरल में 10 साल बाद UDF सरकार का अनुमान नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा...

बंगाल चुनाव में ‘बंपर वोटिंग’, आज़ादी के बाद बना नया रिकॉर्ड, पहले चरण में 93% मतदान

तमिलनाडु के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा 85% वोटिंग कोलकाता। पश्चिम बंगाल और...

पहलगाम हमले की बरसी: PM मोदी ने जान गंवाने वाले निर्दोषों को याद किया, कहा- आतंक के आगे भारत कभी नहीं झुकेगा

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक...