10.5 C
London
Saturday, January 31, 2026
Homeराष्ट्रीयइलाज के खर्च बढ़ने के कारण लोग पौष्टिक भोजन से हो रहे...

इलाज के खर्च बढ़ने के कारण लोग पौष्टिक भोजन से हो रहे हैं दूर, AIIMS की नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Published on

नई दिल्ली:

एम्स के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और मानव पोषण विभाग ने एक स्टडी की है। इस स्टडी में पाया गया है कि इलाज के खर्च बढ़ने के कारण लोग पौष्टिक भोजन से दूर हो रहे हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि 80% से अधिक परिवारों ने अनाज, दाल और चीनी की मात्रा कम नहीं की, लेकिन फलों की खपत कम कर दी। इसके बाद, घी, दूध और दूध उत्पाद, सब्जियां, मांस, अंडे और तेल की खपत भी कम हो गई। अध्ययन के प्रमुख डॉ अनुप सारया ने कहा कि इसका संभावित कारण यह हो सकता है कि अनाज और दालें सस्ती होती हैं और इन्हें अकेले भी खाया जा सकता है, जबकि फल महंगे होते हैं और भूख भी नहीं मिटाते।

414 मरीजों पर किया गया था अध्ययन
एम्स का यह अध्ययन जर्नल इमराल्ड इनसाइट में प्रकाशित हुआ था। इसका उद्देश्य यह जानना था कि स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च का घरेलू बजट पर दबाव पड़ने और भोजन की आदतों में बदलाव पैदा करने पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन एक अस्पताल में आधारित क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन था, जिसमें 414 ऐसे मरीज शामिल थे जिनका किसी गंभीर या पुरानी बीमारी का इलाज चल रहा था। अध्ययन में शामिल इन 414 मरीजों के परिवारों में कुल 2,550 सदस्य थे। इस अध्ययन के अनुसार, लंबी बीमारी का मतलब ऐसी बीमारी से था जो कम से कम एक साल तक रहती है, जिसके लिए डॉक्टर को नियमित रूप से दिखाना पड़ता है और रोजाना के कामों में परेशानी होती है या दोनों ही स्थितियां हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, क्रोनिक पैन्क्रिएटाइटिस (अग्नाशय की लंबी बीमारी), इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (आंतों में सूजन की लंबी बीमारी) और क्रोनिक लिवर डिजीज (जिगर की लंबी बीमारी) को शामिल किया गया।

इलाज का खर्च बढ़ा, पौष्टिक आहार घटा
शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रामीण परिवारों में शहर के परिवारों की तुलना में खाने-पीने की चीजों में कमी 1.8 गुना अधिक देखी गई। जिन घरों में मरीज भर्ती थे, वहां खाने की खपत में 1.3 गुना कमी आई। बीमारी के बाद न केवल खाने-पीने की चीजों में कमी आई, बल्कि खाने की गुणवत्ता भी कम हो गई। उदाहरण के लिए, दूध और सब्जी में पानी मिलाना या सस्ते बिना पैकेज वाले खाद्य पदार्थ खरीदना। इसके अलावा, बीमारी के अतिरिक्त खर्च के भयानक प्रभाव बच्चों पर भी देखे गए, जहां खाने-पीने की चीजों में कमी करने वाले कई परिवारों ने बच्चों की शिक्षा को नजरअंदाज कर दिया या बच्चों ने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए काम करना शुरू कर दिया। शोधकर्ताओं के अनुसार, समान स्वास्थ्य देखभाल के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की नीतियों के माध्यम से स्वास्थ्य व्यय बढ़ाया जाना चाहिए। नीतियों और हस्तक्षेपों को डिजाइन करते समय लागू किए जा सकने वाले उपायों की पहचान करने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

Latest articles

बीएचईएल की पहल: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विक्रेता किए गए सम्मानित

भोपाल भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) की भोपाल इकाई द्वारा गत दिवस वेंडर रिकग्निशन प्रोग्राम...

संविदा कर्मचारियों के लिए —बड़ी घोषणा सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- 2023 की महापंचायत के वादे होंगे पूरे, बनेगी उच्च स्तरीय समिति

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संविदा और सहायक कर्मचारियों के हितों को...

शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष के बीच घंटों चली चर्चा

भोपाल भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भले ही...

More like this

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में पीएमश्री विद्यालय बन रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रतीक

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में पीएमश्री विद्यालय बन रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रतीक...

बीएचईएल महारत्न कंपनी की कई यूनिटों के अफसरों की नौकरी पर प्री–मैच्योर रिटायरमेंट की गाज—अपने आकाओं को तलाश रहे हैं नौकरी बचाने

नई दिल्ली।भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल), भोपाल  की कई यूनिटों के अफसरों पर गिरेगी...

अजित पवार के निधन पर शोक सीएम मोहन यादवने दी श्रद्धांजलि

भोपाल ।महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में बुधवार सुबह हुए विमान हादसे में...