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400 पार का नारा और फिर बहुमत से ही दूर रहगई …बीजेपी के लिए कैसा रहा साल 2024?

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नई दिल्ली

केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने साल 2024 में बेहद उतार-चढ़ाव भरा सफर तय किया। इसकी शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनावों से ही हो गई, जब पार्टी ने ‘अबकी बार, 400 पार’ का नारा दिया। हालांकि, बीजेपी नेतृत्व जनता का मूड भांपने में नाकामयाब साबित हुआ। 400 पार का नारा लगाने वाली पार्टी खुद बहुमत से दूर रह गई। ऐसे में पार्टी को लेकर कई तरह की चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया। हालांकि, बीजेपी नेतृत्व ने सभी कयासों को धता बताते हुए जल्द वापसी की। हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पार्टी ने शानदार जीत हासिल करके अपनी राजनीतिक ताकत फिर से साबित की। वहीं नए साल में पार्टी को अपने नए अध्यक्ष की तलाश भी रहेगी।

बीजेपी की ताकत और कमजोरियां आई सामने
साल 2024 में बीजेपी की कमजोरियां और ताकत पूरी तरह से सामने आई। हालांकि, जो बात सबसे अलग रही, वो यही थी कि पार्टी अपने मैसेज और तरीकों को जमीन से उठने वाली आवाजों के हिसाब से ढालने में सफल रही। इस साल जनवरी में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का भव्य उद्घाटन समारोह हुआ। इसके जरिए केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनावों में अभूतपूर्व फायदा मिलेगा। लेकिन आम चुनाव में पार्टी ने अपना बहुमत खो दिया। ऐसे में बहुत लोगों को ऐसा लगा कि यह बीजेपी के लिए उलटफेर की शुरुआत है।

लोकसभा चुनाव में पार्टी को लगा झटका
सत्तारूढ़ पार्टी ने 2019 में जीती गई 303 सीटों से भी अधिक जनादेश के साथ लोकसभा चुनावों के बाद सत्ता में वापसी के उद्देश्य से ‘अबकी बार, 400 पार’ का नारा दिया था। आम चुनाव के नतीजे प्रतिकूल आए। 543 सदस्यीय लोकसभा में एनडीए गठबंधन ने 294 सीट हासिल की, जिससे गठबंधन को बहुमत की सरकार बनाने में कोई कठिनाई नहीं हुई। दूसरी ओर, कांग्रेस को अकेले 99 सीटें मिली, जो पार्टी की उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन था। पिछले एक दशक में आम चुनावों में उसका यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

2024 के रण में कहां चूक गई बीजेपी
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अकेले दम पर बहुमत नहीं मिलने से एक तरफ पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का एक वर्ग बदल गया। वहीं वोटर्स का एक वर्ग भी चिंतित था। बीजेपी के ‘अहंकार’ के विरोध में विपक्ष ने ‘संविधान खतरे में’ का नारा दिया, और इसका प्रभाव भी वोटर्स पर दिखा। आम चुनावों के दौरान जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरी तरह सक्रिय नहीं दिखा। हालांकि, उसके सहयोगी और समर्थक बाद में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी के कैंपेन में पूरी ताकत से मदद करते नजर आए, जिसका सीधा असर चुनाव नतीजों में दिखा।

हरियाणा-महाराष्ट्र में जीत से पार्टी में उत्साह
भले ही इस साल पार्टी के लिए रास्ता उसकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। फिर भी पार्टी ने, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय जीत हासिल कर एक बार फिर देश के राजनीतिक नक्शे पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बिखरते ‘इंडिया’ गठबंधन की वजह से बीजेपी ने इस साल खुद को देर से ही सही, संभाल लिया। बीजेपी के कुछ गठबंधन दूरदर्शी साबित हुए।

कहीं चला गठबंधन का दांव तो कहीं ‘एकला चलो’ की नीति
आंध्र प्रदेश में, पार्टी ने तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से हाथ मिलाया, जबकि उसके वरिष्ठ नेताओं के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से अच्छे संबंध थे। ओडिशा में, बीजेपी ने बीजू जनता दल से बातचीत बंद कर दी। ये दोनों कदम निर्णायक साबित हुए। टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश में गठबंधन सत्ता में आया। ओडिशा में पहली बार बीजेपी सत्ता में आई। इन दोनों राज्यों की 41 सीटों ने केंद्र में मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बनाने में मदद की।

नए साल पर पार्टी के सामने कई चुनौतियां
अब नया साल आ रहा है, ऐसे में पार्टी की ओर से नरेंद्र मोदी ही निर्विवाद नेता बने हुए हैं। उनकी सरकार ने अब तक गठबंधन की सरकार के तौर पर कोई भी कमजोरी नहीं दिखाई है। दूसरी ओर साल 2024 का आखिरी दौर आते-आते विपक्षी ‘इंडिया’ गुट में बिखराव के संकेत दिखने लगे और सहयोगी दल कांग्रेस से खुद को दूर कर रहे हैं। ऐसे में स्थितियां बीजेपी के हक में दिख रही हैं। हालांकि, कई अहम फैसले भी पार्टी को नए साल 2025 में लेने हैं। इसमें सबसे अहम है बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव।

कौन होगा बीजेपी का अध्यक्ष
जिस तरह से 2024 के कई फैसले बीजेपी के हक में गए, ऐसे में बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बन चुके हैं। ऐसे में उनकी जगह नए अध्यक्ष का चुनाव भी पार्टी नेतृत्व को करना है। माना जा रहा कि नए साल में बीजेपी नेतृत्व इस पर फाइनल फैसला लेगी। पार्टी के वैचारिक मार्गदर्शक माने जाने वाले हिंदुत्व संगठन की इस चुनाव में अहम भूमिका होगी। अब देखना दिलचस्प होगा पार्टी नेतृत्व नए अध्यक्ष के लिए किस पर अपना भरोसा जताएगा।

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