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PM मोदी ने अजीत डोभाल पर फिर जताया भरोसा… तीसरी बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त

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नई दिल्ली,

अजीत डोभाल पर भरोसा जताते हुए पीएम मोदी ने उन्हें तीसरी बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया है. वहीं डॉ. पीके मिश्रा को भी दोबारा प्रधानमंत्री का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है. पीएम मोदी की आंख और कान कहे जाने वाले अजीत डोभाल 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. आईबी प्रमुख रहे डोभाल 31 मई 2014 को प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने थे.

दरअसल, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करते हैं, जिनका मुख्य काम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री को सलाह देना होता है. एनएसए का यह पद पहली बार 1998 में तब बनाया गया था जब देश में दूसरी बार परमाणु परीक्षण किए गए थे. सरकार में यह काफी अहम पद होता है.

चाहे 370 हो, सर्जिकल स्ट्राइक हो, डोकलाम हो या कूटनीतिक फैसले, डोभाल देश की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं. पुलवामा का बदला, जिसे पाकिस्तान कभी नहीं भूल पाएगा, वह भी डोभाल के नेतृत्व में लिया गया. पुलवामा हमले के एक पखवाड़े के भीतर पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को खत्म करने की वायुसेना की रणनीति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नेतृत्व में ही तैयार हुई थी. वायुसेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारियों से रणनीति पर चर्चा करने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हर पल की जानकारी देने तक उन्होंने अहम भूमिका निभाई.

पंजाब से लेकर नॉर्थ ईस्ट, कंधार से लेकर कश्मीर तक…
डोभाल 1972 में इंटेलिजेंस ब्यूरो में शामिल हुए थे. अपनी 46 साल की सर्विस में उन्होंने सिर्फ 7 साल ही पुलिस की वर्दी पहनी क्योंकि डोभाल का ज्यादातर समय देश के खुफिया विभाग में बीता है, इसीलिए डोभाल का करियर भी उतना ही करिश्माई रहा है, जितना पहली नजर में वह सामान्य नजर आते हैं. अजीत डोभाल एक ऐसे शख्स हैं जिन्हें देश की आंतरिक और बाहरी दोनों ही तरह की खुफिया एजेंसियों में लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम करने का बड़ा अनुभव है. वह इंटेलिजेंस ब्यूरो के चीफ रह चुके हैं.

कीर्ति चक्र से सम्मानित हो चुके डोभाल
अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. उन्हें काफी तेज तर्रार अधिकारी माना जाता है. उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 1988 में कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, जो आम तौर पर वीरता के लिए सशस्त्र बलों को दिया जाता है. इसके अलावा वह भारतीय पुलिस पदक पाने वाले सबसे कम उम्र के अधिकारी थे. वह विवेकानंद के गैर-सरकारी संगठन की एक शाखा विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के निदेशक रहे हैं.

डॉ. पीके मिश्रा PM के प्रधान सचिव नियुक्त
नई कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया है कि पूर्व आईएएस अधिकारी पी के मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 10 जून, 2024 से प्रभावी होगी। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 10.06.2024 से प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में डॉ पी के मिश्रा, आईएएस (सेवानिवृत्त) की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री के कार्यकाल के साथ या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, तक रहेगी.

 

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