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जिस जगह शव मिलने की ज्यादा उम्मीद, वहां जोर पकड़ेगा रेस्क्यू ऑपरेशन, वायनाड हादसे पर बोले केरल के मंत्री

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नई दिल्ली,

केरल के वायनाड में हुए भयानक भूस्खलन से हर रोज डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही है. मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. अभी भी सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है. इसी बीच राज्य के पर्यटन मंत्री पीए मोहम्मद रियास ने रविवार को कहा कि उत्तरी केरल के इस जिले में भूस्खलन प्रभावित इलाकों में छठे दिन भी बचाव अभियान जारी रहेगा और उन स्थानों पर अधिक बल और उपकरण तैनात किए जाएंगे जहां शव मिलने की संभावना अधिक है.

मंत्री रियास ने मीडिया से बातचीत में रविवार को कहा कि वायनाड, मलप्पुरम और कोझिकोड जिलों से होकर बहने वाली चालियार नदी के 40 किलोमीटर के इलाके में तलाशी अभियान जारी रहेगा. क्योंकि मलप्पुरम में नीलांबुर के पास कई शव और अवशेष बरामद हुए हैं. मंत्री ने कहा कि भूस्खलन से तबाह हुए मुंडक्कई और चूरलमाला क्षेत्रों में ऑपरेशन पिछले कुछ दिनों की तरह ही जारी रहेंगे और उन स्थानों पर अधिक बल और उपकरण आवंटित किए जाएंगे जहां मलबे के नीचे अवशेष मिलने की संभावना है.

‘लोगों की हर संभव मदद की जाएगी’
मंत्री ने कहा कि शिविरों और अस्पतालों में मौजूद लोगों को हर संभव मदद दी जाएगी.मंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने पहचान और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड खो दिए हैं उनकी मदद के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा किसी भी तरह से बाधित न हो. जिला प्रशासन के अनुसार, शनिवार रात तक 219 शव और 143 से अधिक शरीर के टुकड़े बरामद किए गए, जबकि 206 लोग अभी भी लापता हैं.लापता लोगों की तलाश के लिए रडार, ड्रोन और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है.राज्य सरकार ने विस्थापित पीड़ितों के पुनर्वास के लिए एक नई टाउनशिप स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की है.

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने मीडिया से की ये अपील
केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने मीडिया से कहा की बच्चों से यह न पूछें कि आपदा में क्या हुआ। यह भी न पूछें कि उन्होंने इस हादसे में किन्हें खोया है.अगर बच्चों की पहचान उजागर कर रहे हैं तो ऐसा उनके माता-पिता या अभिभावकों की अनुमति से ही करें.मंत्री ने कहा कि इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है.

वायनाड में कैसे आई त्रासदी
वायनाड में आई आपदा का केंद्र इरुवाझिंझी नदी है, जो लगभग 1800 मीटर की ऊंचाई पर है और तीन प्रभावित गांवों- व्यथरी तालुका में मुंदक्कई, चूरलमाला और अट्टामाला से होकर बहती है. इसके बाद यह चलियार नदी में मिल जाती है. बारिश के बाद नदी के पानी में बढ़ोतरी हो गई और इसकी जल धाराएं ज्यादा तेज हो गईं. अधिकारियों का कहना है कि व्याथरी (Vythri) में 48 घंटों में लगभग 57 सेमी बारिश हुई, जिसके बाद इरुवाझिंझी में उफान आया और भूस्खलन हुआ. केरल के मुख्य सचिव वी वेणु ने कहा, “इस तरह की बारिश, विशेष रूप से संवेदनशील उच्च पर्वतमाला में भूस्खलन को बढ़ावा दे सकती है.”

भूस्खलन का मलबा नदी में गिर गया और मलबे की एक दीवार बन गई. इसके बाद ऊपर की तरफ के गांव जलमग्न हो गए. ऊपर की पहाड़ियों से नदी में बहता भारी बारिश का पानी और ढलान आपदा की वजह बने. रिमोट सेंसिंग डेटा से पता चलता है कि नदी के रास्ते पर पहला गांव मुंदक्कई, जो अब समतल और तबाह हो गया है, लगभग 950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर केंद्र लगभग आधा है.

सैटेलाइट इमेजरी और न्यूज रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अगस्त 2020 में एक भूस्खलन हुआ था, जिसने मुंडक्कई में प्रवेश करने से पहले इरुवाझिंझी नदी के किनारे के पेड़ों को नष्ट कर दिया था. जल संसाधनों पर काम करने वाले GIS एक्सपर्ट राज भगत पलानीचामी ने कहा कि तीन पेड़ों के नष्ट होने से चट्टानों और भूस्खलन के मलबे को खुली छूट मिल गई. उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, “मेरा प्रारंभिक आकलन कहता है कि वनस्पति ने इसके प्रभाव को कम किया होगा.

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