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L से लेस्बियन, G से गे… LGBTQIA+ का मतलब जान लीजिए, सुप्रीम कोर्ट में खूब हो रही चर्चा

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नई दिल्ल

दो दिन से सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। केंद्र सरकार ने शहरी रईसों का कॉन्सेप्ट बताते हुए इसका विरोध किया है। तर्क दिया जा रहा है कि विवाह महिला और पुरुष के बीच हो सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला या पुरुष की कोई पूर्ण अवधारणा नहीं है। इस दौरान चीफ जस्टिस चंद्रचूड़, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी कोर्ट में अपनी बात रखते हुए कई बार LGBTQ+ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि इस शब्द का क्या मतलब होता है। दरअसल, LGBTQIA+ में हर अक्षर का एक मतलब होता है। इसमें सेक्सुअल स्वभाव के लिहाज से एक विशिष्ट समुदाय को संबोधित किया जाता है। यह उनकी लैंगिक पहचान होती है।

l-lesbian-
जब कोई महिला किसी दूसरी महिला के साथ शारीरिक, रोमांटिक और भावुकता वाले रिश्ते रखती है या आकर्षित होती है तो उसे लेस्बियन की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि कुछ लेस्बियन भी खुद को गे या गे विमन कहलाना पसंद करते हैं।

G – gay (गे)
गे आमतौर पर एक पुरुष की दूसरे पुरुष के साथ शारीरिक और रोमांटिक आकर्षण को व्यक्त करता है। लेस्बियन महिलाओं के लिए और गे शब्द पुरुषों के लिए लिखा जाता है।जब किसी व्यक्ति को किसी पुरुष और महिला दोनों के साथ शारीरिक और रोमांटिक आकर्षण होता है तो उसे बाईसेक्सुअल की श्रेणी में रखा जाता है। एक बात पर ध्यान रखने की जरूरत है कि बाइसेक्सुअल लोगों के लिए इस कैटगरी का कहे जाने के लिए सेक्स का अनुभव जरूरी नहीं है।

T बोले तो transgender (ट्रांसजेंडर)
इस टर्म का अगला अक्षर ट्रांसजेडर से जुड़ा है। इस श्रेणी में ऐसे लोग आते हैं जिनका लिंग जन्म के समय तय लिंग से मेल नहीं खाता है। हॉर्मोन की समस्या या दूसरे किसी कारण से ऐसे लोगों में दोनों लिंगों के गुण आ जाते हैं।यह अक्षर ऐसे लोगों के बारे में संकेत देता है, जिनका सेक्सुअल रवैया सामान्य नहीं है। हालांकि एलजीबीटीक्यू समुदाय में भी Q को पूरी दुनिया में स्वीकार नहीं किया जाता है।

I से intersex (इंटरसेक्स)
यह एक शारीरिक स्थिति है। इसके साथ व्यक्ति पैदा होता है। जन्म के साथ व्यक्ति के शरीर में एक या अधिक सेक्स से संबंधित विशेषताएं होती हैं। इसमें लिंग, आंतरिक प्रजनन अंग आदि हो सकते हैं।इस श्रेणी में उस व्यक्ति को रखा जाता है जो किसी तरह के सेक्सुअल आकर्षण को महसूस नहीं करता है। इसमें नॉन-रोमांटिक लोग भी हो सकते हैं यानी जिनके भीतर कोई रोमांस पैदा नहीं होता है।आगे + लिखने का मतलब ऐसे सभी लैंगिक पहचान से होता है, जिसे इसमें शामिल किया जा सकता है। यह एक तरह से ऐसे लोगों का अपना समुदाय है।

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