9.5 C
London
Tuesday, April 28, 2026
Homeराष्ट्रीयअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारो को फिर दिखाया...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारो को फिर दिखाया आईना, जानें इमरान प्रतापगढ़ी मामले को लेकर कोर्ट की बड़ी बातें

Published on

नई दिल्ली

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता स्वस्थ और सभ्य समाज का अभिन्न अंग है, जिसके बिना सम्मानजनक जीवन जीना असंभव है। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार को तुच्छ और काल्पनिक आधारों पर कुचला नहीं जा सकता। शीर्ष कोर्ट ने गुजरात पुलिस की ओर से कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘ऐ खून के प्यासे बात सुनो’ कविता पोस्ट करने के मामले में शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को खारिज कर दिया।

FIR आंख मूंदकर नहीं दर्ज होनी चाहिए: SC
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि एफआईआर आंख मूंदकर दर्ज नहीं की जानी चाहिए। यह पता लगाने के लिए प्रारंभिक जांच की जानी चाहिए कि क्या प्रथम दृष्टया बीएनएस के तहत धारा 196 और 197 (1) के तहत मामला बनता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र का अभिन्न अंग है, जजों को इसकी रक्षा करनी चाहिए, भले ही उन्हें व्यक्त विचार पसंद न आए।

सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
  • हमारे गणतंत्र के 75 वर्षों के बाद भी हम अपने मूल सिद्धांतों के मामले में इतने कमजोर नहीं दिख सकते कि महज एक कविता या किसी भी प्रकार की कला या मनोरंजन, जैसे स्टैंड-अप कॉमेडी के माध्यम से विभिन्न समुदायों के बीच द्वेष या घृणा पैदा करने का आरोप लगाया जा सके।
  • ऐसे दृष्टिकोण को अपनाने से सार्वजनिक क्षेत्र में सभी वैध विचारों की अभिव्यक्ति बाधित होगी, जो स्वतंत्र समाज के लिए बहुत ही मौलिक है।
  • व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूहों द्वारा विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति स्वस्थ और सभ्य समाज का अभिन्न अंग है। विचारों और दृष्टिकोणों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना सम्मानजनक जीवन जीना असंभव है, जिसकी गारंटी संविधान के अनुच्छेद 21 में दी गई है।
  • किसी स्वस्थ लोकतंत्र में विचारों, सोच और मतों का विरोध किसी अन्य दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। भले ही बड़ी संख्या में लोग किसी के व्यक्त विचारों को नापसंद करते हों, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए। कविता, नाटक, फिल्म, व्यंग्य और कला समेत साहित्य मानव जीवन को अधिक सार्थक बनाता है।
  • कविता के शब्द वैमनस्य या घृणा को बढ़ावा नहीं देते बल्कि लोगों को हिंसा का सहारा लेने से बचने और प्रेम के साथ अन्याय का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
  • कविता का धर्म, जाति, समुदाय या किसी विशेष समूह से कोई लेना-देना नहीं है।
  • कविता के शब्द केवल शासक द्वारा किए गए अन्याय को चुनौती देने का प्रयास करता है।
  • यह कहना असंभव है कि अपीलकर्ता द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द सार्वजनिक शांति को भंग करते हैं या भंग करने की संभावना रखते हैं।
  • किसी भी तरह से यह विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा नहीं देता है। हम यह समझने में विफल हैं कि इसमें दिए गए बयान राष्ट्रीय एकता के लिए कैसे हानिकारक हैं और ये बयान राष्ट्रीय एकता को कैसे प्रभावित करेंगे। स्पष्टतः यह कविता किसी की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने का दावा नहीं करती है।
  • शीर्ष अदालत ने कहा कि मौखिक या लिखित शब्दों को लेकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 के तहत अपराध के संबंध में फैसला किसी तर्कसंगत एवं मजबूत दिमाग वाले दृढ़ एवं साहसी व्यक्ति के मानकों के आधार पर करना होगा, न कि कमजोर एवं अस्थिर दिमाग वाले लोगों के मानकों के आधार पर।
  • प्राथमिकी एक ‘बहुत ही मशीनी तरीके से किया गया काम’ और ‘कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग’ प्रतीत होती है।
  • पुलिस अधिकारी नागरिक होने के नाते संविधान का पालन करने के लिए बाध्य हैं। वे सभी नागरिकों को दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने और उसे बनाए रखने के लिए बाध्य हैं।

इमरान प्रतापगढ़ी से जुड़ा पूरा मामला जानिए
इमरान प्रतापगढ़ी पर एफआईआर गुजरात के जामनगर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 196, 197, 299, 302 और 57 के तहत दर्ज की गई थी। धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सौहार्द को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। गुजरात हाईकोर्ट ने 17 जनवरी 2025 को एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने कहा था कि कविता में ‘सिंहासन’ शब्द का उल्लेख किया गया था और पोस्ट पर प्रतिक्रियाएं सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ने का संकेत देती थीं। हालांकि प्रतापगढ़ी ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अब शीर्ष कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया।

Latest articles

विधानसभा में 33% महिला आरक्षण का संकल्प पारित: CM बोले-कांग्रेस ने बहनों की क्षमता-आकांक्षाओं की पीठ में खंजर घोंपा

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष एक दिवसीय सत्र में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’...

मनरेगा ई-केवाईसी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल: 97.11% लक्ष्य पूरा कर रचा इतिहास, बड़े राज्यों को भी पछाड़ा

  रायपुर। छत्तीसगढ़ ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से की शिष्टाचार भेंट, विकास और जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने बेंगलुरु प्रवास के दौरान कर्नाटक के...

More like this

बंगाल चुनाव में ‘बंपर वोटिंग’, आज़ादी के बाद बना नया रिकॉर्ड, पहले चरण में 93% मतदान

तमिलनाडु के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा 85% वोटिंग कोलकाता। पश्चिम बंगाल और...

पहलगाम हमले की बरसी: PM मोदी ने जान गंवाने वाले निर्दोषों को याद किया, कहा- आतंक के आगे भारत कभी नहीं झुकेगा

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक...

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...