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‘पीएम मोदी को श्रेय लेने का कोई हक नहीं’: तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण पर दिग्विजय सिंह ने भी थपथपाई कांग्रेस की पीठ

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नई दिल्ली:

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के मामले में दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका श्रेय नहीं दिया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले की नींव कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने डाली थी और उसी की कोशिशों का परिणाम है कि आज राणा भारत में है। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज कांग्रेसी पी चिदंबरम भी इसी तरह से यूपीए सरकार की पीठ थपथपा चुके हैं।

‘पीएम मोदी को कोई श्रेय नहीं दिया जा सकता’
दिग्विजय सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ’26/11 के हमलों के मामले में तहव्वुर राणा का नाम पहले ही सामने आ गया था। यूपीए सरकार ने समय रहते उसकी जांच शुरू कर दी थी और अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की थी। वह वहां 14 साल की सजा काट चुका है और अब उसकी भारत में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसमें पीएम मोदी को कोई श्रेय नहीं दिया जा सकता। कांग्रेस ने इसकी शुरुआत की थी और उसी की मेहनत रंग लाई है।’इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने भी बीजेपी सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रत्यर्पण ‘वर्षों की मेहनत’ और ‘यूपीए सरकार द्वारा की गई ठोस तैयारी’ का नतीजा है।

चिदंबरम ने भी यूपीए सरकार को दिया है श्रेय
चिदंबरम ने एक बयान में कहा, ‘फरवरी में पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन असल में यह यूपीए सरकार के वर्षों पुराने प्रयासों का फल है। भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि राणा का 26/11 की साजिश में हाथ था, जिसकी जड़ें 2005 तक जाती हैं। उसी दौरान उसने लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के एजेंटों से समन्वय किया था। आखिरकार 8 अप्रैल को अमेरिकी अधिकारियों ने उसे भारत को सौंप दिया।’

तहव्वुर राणा 18 दिनों की NIA रिमांड में
पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक 64 वर्षीय तहव्वुर राणा पर भारत में मुंबई हमलों से जुड़े 10 आपराधिक मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा। एनआईए ने लगातार प्रयासों के बाद राणा के प्रत्यर्पण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। तहव्वुर राणा भारत लाने के लिए भारत सरकार ने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और अमेरिका में उसके सभी कानूनी विकल्प खत्म हो जाने के बाद अंततः 10 अप्रैल को उसे भारत लाया गया। उसी दिन उसे एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 18 दिनों की एनआईए हिरासत में भेज दिया।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि मोदी सरकार इस मामले में केवल अंतिम चरण की प्रक्रिया का हिस्सा रही है, जबकि असली ग्राउंडवर्क कांग्रेस के कार्यकाल में हुई थी। दिग्विजय सिंह और चिदंबरम दोनों का दावा है कि राणा की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के लिए असल प्रयास यूपीए सरकार के समय ही शुरू हो चुके थे, जिसकी वजह से वह भारत लाया जा सका है।

इस वजह से इस मुद्दे पर सियासी संग्राम तेज हो गया है, जहां एक ओर भाजपा सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में अपनी बड़ी सफलता बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे अपने शासनकाल की दूरदर्शिता और सख्त नीति का नतीजा बताने में जुटी है।

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