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चार दिन के संघर्ष से बहुत कुछ बदल गया… भारत-पाकिस्तान की लड़ाई को बड़ा बदलाव क्यों कह रहे हैं एक्सपर्ट

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इस्लामाबाद

भारत और पाकिस्तान के बीच 6 से 10 मई के बीच सैन्य संघर्ष देखने को मिला। ये संघर्ष भले ही चार दिन से भी कम चला लेकिन इसमें सिर्फ भारत और पाकिस्तान ही नहीं बल्कि कई देशों के हथियार ‘टेस्ट’ कर लिए गए। इसमें खासतौर से फ्रांस, रूस और चीन के हथियार शामिल थे। भारत ने भी अपने बनाए हथियार पहली बार इस तरह से इस्तेमाल किए। इस लड़ाई को हथियार निर्माता कंपनियों और रक्षा विशेषज्ञों ने ध्यान से देखा। इसमें जिस तरह ड्रोन, मिसाइल, जेट और लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल हुआ। उससे पता चलता है कि कि भविष्य में लड़े जाने वाले युद्ध कैसे होंगे।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मामलों के जानकार संदीप उन्नीथन कहते हैं कि किसी लड़ाई से ही हथियार बनाने वाली कंपनियों को पता चलता है कि उनके वेपन कैसे काम करते हैं। फिर वे उनमें सुधार करते हैं और उन्हें बेचते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच हुई हवाई, मिसाइल और ड्रोन की लड़ाई का हर बड़ा हथियार बेचने वाला देश विश्लेषण करेगा।

ड्रोन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल
भारत और पाकिस्तान के इस संघर्ष में जिस तरह से ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। उससे दुनिया को ये पता चला है कि दुश्मन के इलाके में बम गिराने के लिए अब विमान भेजने की जरूरत नहीं है। लड़ाकू विमानों से छोड़े जाने लंबी दूरी के हथियार भी दुश्मन को सैकड़ों किलोमीटर दूर से मार सकते हैं। भारत ने सुखोई Su-30MKI विमान से ब्रह्मोस मिसाइल पाकिस्तान के अंदर छोड़कर इसको दिखाया।

अमेरिका के सेना से रिटायर कर्नल जॉन स्पेंसर कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच का संघर्ष कुछ नया दिखाने वाला रहा। युद्ध को हथियारों के परीक्षण की सही जगह कह सकते हैं। इतिहास में भी लड़ाइयां सैन्य तकनीक को परखने का मैदान रही हैं। इस बार भारत में बनी ब्रह्मोस मिसाइलों को पहली बार परखा गया, जो सफल रहा।

राफेल और चीनी जेट
सीआरएफ के सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट कर्नल राजीव अग्रवाल (रिटायर्ड) कहते हैं, ‘इस छोटी सी लड़ाई में कई तरह के हथियार इस्तेमाल किए गए। इनमें कुछ भारत में बने थे तो कुछ विदेश से खरीदे थे। फ्रांस के बहुचर्चित राफेल विमान और हैमर ग्लाइड बम भी पहली बार किसी देश के खिलाफ हवाई हमले में इस्तेमाल किए गए।

चीन की मिसाइलें- HQ9, HQ16 और PL-15 और लड़ाकू विमान- J-10 और JF-17 पहली बार लड़ाई में इस्तेमाल किए गए। चीन के हवाई सुरक्षा (AD) सिस्टम को भी पहली बार परखा गया। भारत, इजरायल, फ्रांस, तुर्की और चीन के हथियारों का इस्तेमाल यह भी दिखाता है कि हथियारों के बाजार में अब अमेरिका और रूस का दबदबा टूट गया है।

एक्सपर्ट का कहना है कि भारत-पाक के संघर्ष ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय की लड़ाई पुराने युद्धों से अलग होंगे। एक लंबे समय तक दो पड़ोसी देशों की लड़ाई को सरहद के संघर्ष की तरह देखा जाता था लेकिन अब बॉर्डर की अहमियत घट गई है। साफ है कि आने वाले समय में बॉर्डर से सैकड़ों किमी दूर से ही हवा में लड़ाई लड़ी जाएंगी।

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