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मालदीव के बाद नेपाल में सफल हुई चीन की चाल! पीएम प्रचंड और ओली आए साथ, भारत समर्थक देउबा लगे किनारे

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काठमांडू:

मालदीव के बाद भारत के एक और पड़ोसी देश नेपाल में राजनीतिक घटनाक्रम अचानक से तेजी से बदलना शुरू हो गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के साथ नया गठबंधन बनाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही प्रचंड और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की पार्टी नेपाली कांग्रेस का 15 महीने पुराना गठबंधन टूट गया है। माना जा रहा है कि प्रचंड और देउबा की पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व में खटास के बाद यह गठबंधन टूटा है। वहीं इसमें चीनी राजदूत की भी भूमिका की चर्चा है। इससे पहले चीन ने कई बार वामपंथी एकता पर जोर दिया था ताकि एक बार फिर से इस हिमालयी राष्‍ट्र में उसका प्रभाव बढ़ सके। देउबा को भारत समर्थक माना जाता था और जब वह सत्‍ता में आए थे तो उन्‍होंने नई दिल्‍ली के साथ रिश्‍ते सामान्‍य किए थे।

वहीं देउबा से पहले नेपाल के प्रधानमंत्री रहे केपी शर्मा ओली को चीन का समर्थक माना जाता है। ओली ने प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला था। ओली ने चीनी राजदूत के इशारे पर नेपाल का नया नक्‍शा जारी किया था जिसमें उन्‍होंने भारत के लिंपियाधुरा और कालापानी को नेपाल का हिस्‍सा करार दिया था। नेपाल में जब से चीन के नए राजदूत आए हैं, उन्‍होंने कई बार प्रचंड और ओली से मुलाकात की थी। सीपीएन-माओवादी केंद्र के एक पार्टी नेता के अनुसार, प्रचंड के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी और शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस के बीच गठबंधन समाप्त कर दिया गया है क्योंकि दो शीर्ष नेताओं के बीच बढ़ते मतभेद चरम पर पहुंच गए हैं।

प्रचंड की पार्टी ने ओली संग डील पर क्‍या कहा?
सीपीएन-माओवादी के सचिव गणेश शाह ने कहा, “चूंकि नेपाली कांग्रेस ने प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ सहयोग नहीं किया, इसलिए हम एक नए गठबंधन की तलाश करने को मजबूर हैं।” प्रचंड 25 दिसंबर, 2022 को नेपाली कांग्रेस के समर्थन से तीसरी बार प्रधानमंत्री बने थे। नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने के बाद, प्रचंड ने ओली के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी सीपीएन-यूएमएल से हाथ मिलाया है जिन्हें अब तक प्रचंड का शीर्ष आलोचक माना जाता था। ओली की पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन करने पर दरार के बाद पिछले साल प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था।

भारत को खुश करने में जुटे नेपाली पीएम प्रचंड, छिपी है बड़ी रणनीति
सीपीएन-यूएमएल के उपाध्यक्ष सुरेंद्र पांडे के अनुसार, सोमवार दोपहर नई कैबिनेट का गठन किया जाएगा और कैबिनेट का आकार छोटा होगा। प्रचंड की पार्टी और नेपाली कांग्रेस के बीच दरार कुछ परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन के मुद्दे पर नेपाली कांग्रेस नेता और वित्त मंत्री महत और प्रचंड के बीच मतभेदों के बाद बढ़ी। दरार तब और बढ़ गई जब नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा चाहते थे कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और नवनिर्वाचित राष्ट्रीय सभा सदस्य कृष्ण सिटौला को राष्ट्रीय सभा का अध्यक्ष बनाया जाए। वहीं प्रचंड अपने नेता को इस अहम पद पर नियुक्‍त करना चाहते थे।

भारत के साथ अच्‍छे संबंध बरकरार रख सकते हैं प्रचंड
गणेश शाह के अनुसार, सोमवार को सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली ने प्रधानमंत्री आवास में पीएम प्रचंड से मुलाकात की और एक नया गठबंधन बनाने से संबंधित मामलों पर चर्चा की। विश्‍लेषकों के मुताबिक ओली की वापसी भले ही हो रही है लेकिन प्रचंड भारत के साथ रिश्‍तों में संतुलन बनाकर चल सकते हैं। प्रचंड ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रिश्‍ते मजबूत करने पर बल दिया है। हालांक‍ि ओली एक बार फिर से सीमा विवाद का मुद्दा उठा सकते हैं।

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