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चीनी युद्धपोतों के लिए छिपने के सारे रास्ते बंद, PLA ने अगर ताइवान पर किया हमला, तो अमेरिका खोल देगा ‘नरक का रास्ता’

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वॉशिंगटन:

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने का प्लान बनाया है। लेकिन, अमेरिकी नौसेना एक ऐसे प्लान पर काम कर रही है, जो चीनी युद्धपोतों के लिए ‘नरक का रास्ता’ खोल देगा। अमेरिकी नौसेना की स्ट्रैटजी ताइवान को चीनी कहर से बचाना है। अमेरिकी नौसेना के कैप्टन एलेक्स कैंपबेल ने खुलासा किया है, कि ‘रेप्लिकेटर’ इनिशिएटिव का पहला चरण इस साल अगस्त तक शुरू हो जाएगा, जो चीनी नेवी के लिए ‘नरक’ जैसा होगा। कैलिफोर्निया में यूएस नेवल इंस्टीट्यूट (USNI) सम्मेलन में बोलते हुए, कैप्टन कैंपबेल ने अपने प्लान के बारे में पहली बार दुनिया को बताया है।

उन्होंने कहा है, कि ‘रेप्लिकेटर इनिशिएटिव’ के तहत “अगस्त 2025 तक युद्धक विमानों को कई हजार ऑल-डोमेन, एट्रिटेबल ऑटोनॉमस (ADA2) सिस्टम उपलब्ध कराने” के लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम बनाना है, जिसे अमेरिका की पूर्व उप रक्षा सचिव कैथलीन हिक्स ने नवंबर 2024 में तय किया था। आपको बता दें, कि “एट्रिटेबल” शब्द के मायने अमेरिका के लिए ऐसे हथियारों को विकसित करना है, जिसका बार बार इस्तेमाल किया जा सके और जिसके रखरखाव में काफी कम खर्च आए।

अमेरिका का हेलस्केप और रेप्लिकेटर प्लान क्या है?
अमेरिकी सेना के लिए “हेलस्केप” और “रेप्लिकेटर” प्लान एक दूसरे से काफी संबंधित हैं। रेप्लिकेटर परियोजना का पहला चरण पानी के सतह और उप-सतह पर ड्रोन और घूमने वाले हथियारों को एक साथ लाने के लिए डिजाइन किया गया है ताकि “नरक का दृश्य” बनाया जा सके और ताइवान पर चीनी आक्रमण को नाकाम किया जा सके। इस कार्यक्रम के दूसरे चरण में समुद्री और हवाई सिस्टम को सॉफ्टवेयर के साथ अटैच किया जाएगा, जिसका मकसद दुश्मनों को रोकना और हमला करना होगा। इस प्लान के तहत अमेरिका, पानी के अंदर एक साथ हजारों सस्ते ड्रोनों को छोड़ेगा, जिनका काम चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों को डूबोना होगा।

अमेरिकी अधिकारी कैंपबेल ने प्लान का खुलासा करते हुए कहा, कि “यह कोई साइंस और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इसका मकसद उत्पादन को बढ़ाना है। और यू.एस. इंडो-पैसिफिक कमांड के समर्थन में सिस्टम को फील्ड में लाना है।” यू.एस. रेप्लिकेटर इनिशिएटिव का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और कॉमर्शियल टेक्नोलॉजी का फायदा उठाकर हजारों एट्रिब्यूटेबल ऑटोनॉमस सिस्टम को तेजी से स्केल और फील्ड करना है।

ताइवान को बचाना है अमेरिका का मकसद
पिछले साल अगस्त में रेप्लिकेटर प्रोग्राम के पहले चरण के तहत, अमेरिकी सेना ने एरोविरोमेंट के स्विचब्लेड 600 लोइटरिंग म्यूनिशन को खरीदने के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर जारी किए थे। इस प्रोग्राम के तहत दुश्मनों के टैंकों को नष्ट करने वाला ड्रोन आक्रमण को तैयार करना है। ये प्रोग्राम यूक्रेन युद्ध में काफी कामयाब रहा है। इसके बाद, उसी साल नवंबर में, परफॉरमेंस ड्रोन वर्क्स के सी-100 और एन्दुरिल इंडस्ट्रीज के घोस्ट-एक्स को भी रेप्लिकेटर पहल के दूसरे चरण के हिस्से के रूप में चुना गया।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल के दौरान बार-बार जोर देकर कहा था, कि वे आक्रमण की स्थिति में ताइवान की सैन्य सहायता करेंगे। हालांकि नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक ताइवान को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जबकि दूसरी तरफ पेंटागन, चीन के साथ संभावित टकराव की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है, कि डोनाल्ड ट्रंप की ताइवान नीति, चीन के मुताबिक हो सकती है। वो ताइवान की वजह से चीन से पंगा लेने की शायद ही कोशिश करेंगे।

अमेरिका की ‘हेलस्केप रणनीति’ क्या है?
हेलस्केप स्ट्रैटजी का फोकस बेहद साफ है, कि अगर चीन ताइवान पर आक्रमण करता है, तो चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को एक दुर्जेय ड्रोन फोर्स का सामना करना पड़ेगा। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है, कि चीनी फोर्स के लिए ड्रोन से मुकाबला करना काफी मुश्किल भरा होगा और उसके युद्धपोतों के लिए वापसी का रास्ता नहीं होगा। अमेरिका ने इसे इस तरह से डिजाइन किया है, कि अमेरिकी युद्धपोत छिप नहीं पाएंगे और ड्रोन की चपेट में आकर बर्बाद होंगे।

अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के पूर्व कमांडर एडमिरल सैमुअल पापारो ने वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में समझाते हुए कहा था, कि “इस प्लान के तहत जैसे ही चीनी सेना के युद्धपोत ताइवान की तरफ कूच करना शुरू करेंगे, ठीक वैसे ही अमेरिकी ड्रोन उन्हें चारों तरफ से घेर लेंगे। चीन और ताइवान के बीच की दूरी 100 समुद्री मील है और इस दौरान हजारों अमेरिकी मानव रहित पनडुब्बियां, मानव रहित सतह के जहाजों और हवाई ड्रोन उन्हें घेर लेंगे। इससे चीनी सेना के लिए अपने युद्धपोतों को बचाना करीब करीब दुर्लभ हो जाएगा।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि झुंड बनाकर आए सस्ते अंडरवाटर ड्रोन चीनी पनडुब्बियों के लिए छिपना और बचना काफी मुश्किल कर सकते हैं। अमेरिका अपने युद्धपोतों, पनडुब्बियों या फिर विशालकाय मदरशिप ड्रोन से ऐसे हजारों ड्रोन को एक ही बार में लॉंच कर सकता है। हजारों की तादाद में ये ड्रोन 100 मील की समुद्री दूरी को पूरी तरह से पाट सकते हैं और ऑपरेशन के मुताबिक मूवमेंट कर सकते हैं। इससे अमेरिकी सेना को सर्विलांस के लिए काफी वक्त मिल जाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि हजारों की संख्या में आए ये झुंड ड्रोन किसी भी टारगेट को नष्ट कर सकते हैं और किसी भी युद्धपोत को डूबोने की ताकत रखते हैं।

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