वॉशिंगटन
रूस के रक्षा मंत्रालय की तरफ से यह दावा किया गया है कि अमेरिका रणनीतिक तौर पर गैर-परमाणु हथियारों की मदद से उसकी परमाणु क्षमताओं को निष्क्रिय करने में लगा है। मैगजीन मिलिट्री थॉट की तरफ से बताया गया है कि अमेरिका की योजना रूस की परमाणु क्षमता के बड़े हिस्से को प्रभावित करने की है। रूस की मीडिया की तरफ से इस आर्टिकल पर खासी चर्चा हो रही है। इसमें कहा गया है कि कैसे अमेरिका रणनीतिक रूप से जरूरी ऐसे गैर-परमाणु हथियारों को हासिल करना है जो कम समय में टारगेट को तबाह कर सकें। इस तरह के हथियारों पर किसी भी तरह के द्विपक्षीय या फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं।
ताकि बदला न ले सके रूस
रूस की एजेंसी RIA नोवोस्ती की तरफ से एक आर्टिकल जारी किया गया है। इस आर्टिकल में लिखा है, ‘अमेरिका इस तरह के माध्यमों का निर्माण कर रहा है जिसके बाद रूस के परमाणु हथियारों को अप्रभावी किया जा सके।’ एजेंसी की तरफ से बताया गया है कि नाटो और अमेरिका ने प्रतिरोध की जगह अब पूर्वनिर्धारित एक्शन पर आगे बढ़ने पर फैसला कर लिया है।
आर्टिकल के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि वह रणनीतिक तौर पर ऐसी आक्रामक कार्रवाई कर सके जो यह सुनिश्चित करे कि रूस के ज्यादा से ज्यादा परमाणु हथियारों को नष्ट किया जा सके। अमेरिका, रूस की सेनाओं की तरफ से बदला लेने के फैसले से पहले हथियारों को नष्ट करने में लगा है।
रूस ने लगाया था आरोप
इस आर्टिकल में आखिरी में लिखा है कि अमेरिका जो कुछ भी कर रहा है, उसका रूस की सुरक्षा और खतरों से निबटने वाली तत्परता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस आर्टिकल में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया बयानों की मदद से इशारा किया गया है कि यूक्रेन पर हमले के बाद रूस परमाणु हथियारों की मदद भी ले सकता है। सितंबर में पुतिन ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया था कि ये देश रूस के खिलाफ परमाणु ब्लैकमेलिंग में बिजी हैं।
किसके पास कितने हथियार
पुतिन ने यह आरोप तब लगाया था जब उन्होंने यूक्रेन में और ज्यादा सेना की तैनाती का आदेश दिया था। इसी संबोधन में ही पुतिन ने कहा था कि रूस अपनी सीमा की सुरक्षा करने के लिये हर उस माध्यम का प्रयोग करेगा जो उसके पास मौजूद हैं। पुतिन ने इसे क्षेत्रीय अखंडता का सवाल करार दिया था। रूस के पास 6, 257 परमाणु हथियार हैं जबकि अमेरिका के पास 5,550 ही है। जनवरी में आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन की तरफ इस बात की जानकारी दी गई थी। पुतिन ने जो कुछ कहा, वही बात विशेषज्ञों ने भी कही। 27 अक्टूबर को हालांकि पुतिन ने कहा था कि राजनीतिक या फिर सैन्य रूप से परमाणु हथियारों के प्रयोग का कोई प्वाइंट नहीं बनता है।
