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Tuesday, April 7, 2026
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जिनपिंग के खिलाफ नारेबाजी पर बौखलाया चीन, शंघाई में धड़पकड़ तेज, कई प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

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शंघाई

चीन में कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए कड़े लॉकडाउन के खिलाफ शंघाई में छोटे से प्रदर्शन से इसकी शुरुआत हुई और धीरे-धीरे इसमें हजारों लोग शामिल होते गए। प्रदर्शनकारियों ने एक अपार्टमेंट में आग लगने की घटना में मारे गए लोगों की याद में शंघाई में मोमबत्ती जलाई और फूल चढ़ाए। चीन के पश्चिमी शहर उरुमकी में एक अपार्टमेंट में आग लगने की घटना के मद्देनजर किसी ने तख्तियों पर लाल रंग में ‘‘उरुमकी, 11.24, रेस्ट इन पीस’’ लिख दिया। आग की घटना से कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए कठोर लॉकडाउन के नियमों को लेकर लोगों को गुस्सा फूट पड़ा।

पिछले हफ्ते से शुरू हुआ प्रदर्शन
पिछले सप्ताह के अंत में छोटे से प्रदर्शन से इसकी शुरुआत हुई लेकिन बाद में सैकड़ों लोगों की भीड़ इससे जुड़ती गई। एक महिला ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ‘इस्तीफा दो’ के नारे लगाए और अन्य लोगों ने उसका अनुसरण किया। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की। शंघाई में 26 नवंबर को हुआ प्रदर्शन कोई पहला और सबसे बड़ा नहीं था। लेकिन पहली बार मुखर तरीके से चीनी नेतृत्व में बदलाव का आह्वान किया गया। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ दशकों में पहली बार इस तरह लोगों का आक्रोश दिखा।

चीन ने विदेशी ताकतों का हाथ होने का दावा किया
कई राष्ट्रवादी व्लॉगर ने प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का अंदेशा जताया और सरकार ने अस्थिर करने वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की बात की। लेकिन यह प्रदर्शन दिनों दिन बड़ा होते गया। चीन की ‘‘शून्य कोविड’’ नीति के तहत लॉकडाउन को लेकर देश में प्रदर्शन जिस तरह भड़का, उसकी किसी को उम्मीद नहीं थी ना तो प्रशासन को ना पुलिस को और ना ही प्रदर्शनकारियों को भी।

पहचान छिपा कर हिस्सा ले रहे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन में भाग लेने वालों के दोस्तों ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि 26 नवंबर को शंघाई के फ्रेंच कन्सेशन से प्रदर्शन शुरू हुआ। शुरुआत में इसमें स्थानीय कलाकारों और संगीतकारों ने हिस्सा लिया। उत्तर-पश्चिम में स्थित शिनजियांग प्रांत के उरुमकी में 24 नवंबर को अपार्टमेंट में आग की घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई।

चीनी सोशल मीडिया पर भी लोगों का भड़का गुस्सा
कई लोगों ने यह कहते हुए सरकार की आलोचना की थी कि कोविड पर नियंत्रण के लिए लागू सख्त प्रतिबंधों के कारण लोग वहां से निकल नहीं पाए। हालांकि अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया था। चीनी सोशल मीडिया पर भी आक्रोश भड़क उठा। लोगों ने ऑनलाइन पोस्ट में सख्त नियमों की आलोचना की। उरुमकी के लोग भी महीने भर से लागू लॉकडाउन के खिलाफ सड़कों पर उतरे।

फैक्ट्रियों में भी हो रहा प्रदर्शन
मध्य हेनान प्रांत में आईफोन की फैक्टरी में श्रमिकों ने तब हंगामा कर दिया जब उनसे कहा गया कि कोविड नियंत्रण के लिए उन्हें फैक्टरी के भीतर ही रहना होगा। ग्वांगझू के निवासी भी लॉकडाउन लागू करा रहे पुलिसकर्मियों से भिड़ गए। एक अन्य घटना में पुलिस ने बीबीसी के पत्रकार से मारपीट की और उन्हें हिरासत में ले लिया। वहीं जापान की एक पत्रकार ने कहा कि अधिकारियों ने तस्वीरें लेते हुए देखने पर उन्हें 24 घंटे तक हिरासत में रखा।

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