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चीन ने अचानक ताइवान के करीब भेज दी सेना, जवाब में ताइपे ने उठाया बड़ा कदम

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नई दिल्ली,

चीन अपनी विस्तारवादी नीति से बाज नहीं आ रहा है और इसी वजह से पड़ोसी देशों के साथ लगातार बीजिंग का तनाव बना रहता है. अब चीन ने ताइवान के करीब अचानक से सैन्य अभ्यास शुरू किया है जिसके बाद ताइपे ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने सेना को समुद्री क्षेत्र में तैनात कर दिया है. चीन के इस कदम से पूरे क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ गया है.

चीन का लाइव फायर अभ्यास
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बीजिंग के इस कदम की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन बताया है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने दक्षिणी ताइवान के काऊशुंग तट से करीब 74 किलोमीटर दूर लाइव-फायर ड्रिल के लिए एक क्षेत्र तय किया है. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीन ने संयुक्त युद्ध अभ्यास के तहत ताइवान के चारों ओर 32 विमान तैनात किए हैं और द्वीप के दक्षिण से करीब 40 समुद्री मील (74 किलोमीटर) दूर एक क्षेत्र में लाइव-फायर एक्सरसाइज का ऐलान किया है.

बयान में कहा गया कि ताइवान ने निगरानी, चेतावनी और जवाबी कार्रवाई के लिए नेवी, एयरफोर्स और आर्मी को तैनात किया है. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बिना किसी पूर्व चेतावनी के हुई इस एक्सरसाइज में द्वीप के चारों ओर 32 विमानों की तैनाती भी शामिल थी. ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इनमें से 22 ने उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी ताइवान के करीब उड़ान भरी और चीनी युद्धपोतों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग में शामिल हुए.

ताइवान ने सेना को किया तैनात
चीन के इस कदम के जवाब में ताइवान ने हालात में पर बारीकी से नजर रखने और अलर्ट जारी करने के लिए नेवी, एयरफोर्स और आर्मी को भेजा. ताइपे ने बीजिंग पर बलपूर्वक सैन्य रणनीति अपनाने का आरोप लगाया, जिससे द्वीप पर कब्जा करने की साजिश की आशंका और बढ़ गई है. ताइवान कोस्ट गार्ड्स की ओर से एक मालवाहक जहाज और उसके आठ चीनी चालक दल के सदस्यों को हिरासत में लेने के एक दिन बाद चीन का ये सैन्य अभ्यास हुआ है, जब संवेदनशील ताइवान जल क्षेत्र में पेन्घु द्वीप समूह के लिए करीब समुद्री केबल काट दी गई थी.

ताइवान ने बार-बार चीन की ‘ग्रे जोन’ रणनीति पर चिंता जताई है, जिसमें अवैध हवाई घुसपैठ और सीधे टकराव के बिना कब्जा जमाने के लिए रेत खनन जैसी समुद्री गतिविधियां शामिल हैं. चीन की ओर से लगातार ताइवान पर कब्जा करने की धमकी दी जाती रही हैं, जिससे सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि बीजिंग नाकाबंदी लागू करने या आक्रमण को सुविधाजनक बनाने के लिए द्वीप के अहम कम्युनिकेशन सिस्टम को ठप कर सकता है.

क्या दखल देगा अमेरिका?
अमेरिका-चीन संबंधों में ताइवान एक संभावित टकराव का बिंदु बना हुआ है. वॉशिंगटन जो कि ताइवान का प्रमुख हथियार सप्लायर है, चीनी हमले की स्थिति में सैन्य दखल के संबंध में रणनीतिक अस्पष्टता की नीति का पालन करता है. वैसे तो अमेरिकी कांग्रेस ताइवान का मजबूती से समर्थन करती है, फिर भी इस बात की चिंता बनी हुई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद द्वीप की रक्षा के लिए अमेरिका की रणनीति की समीक्षा की जा सकती है.ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने व्यापार असंतुलन को दूर करने और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में निवेश बढ़ाने की कसम खाई है.

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