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डिफेंस डील, कश्मीर, इस्लाम… तुर्की-पाकिस्तान बना रहे गठजोड़, भारत के लिए क्यों हैं खतरे का सबब

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इस्लामाबाद:

भारत के साथ चार दिन चले हालिया संघर्ष पाकिस्तान ने जिन हथियारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया, वो उसे चीन और तुर्की से मिले हैं। खासतौर से जिन ड्रोन से पाकिस्तान ने भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, वो उसने तुर्की की मदद से ही बनाए हैं। चीन से पाकिस्तान को मदद मिलना कोई नई बात नहीं है लेकिन अब तुर्की से भी उसकी दोस्ती गहरी हो रही है। पाकिस्तान और तुर्की राजनीतिक और सैन्य के साथ-साथ विचारधारा (इस्लामी बुनियाद) के स्तर पर करीब आ रहे हैं। तुर्की ना सिर्फ पाकिस्तान को हथियार दे रहा है बल्कि कश्मीर मुद्दे पर भी उसका समर्थन कर रहा है। इसका भारत और तुर्की के रिश्ते पर असर हुआ है। भारत ने हालिया समय में उन देशों से दोस्ती बढ़ाई है, जो तुर्की के विरोधी हैं।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के नेतृत्व में पाकिस्तान से उनके देश के रिश्ते बेहतर हुए हैं। 8 मई की पाकिस्तान की ओर से भारत में हमले के लिए ड्रोन का जो झुंड भेजा गया, उनके तुर्की की कंपनी असिसगार्ड के बनाए सोंगर ड्रोन होने का दावा किया गया है। सोंगर ड्रोन कम तीव्रता वाले युद्धों के लिए बनाए गए हैं। इनमें बंदूकें और ग्रेनेड लगाए जा सकते हैं।

भारत की क्यों लगी है नजर
भारत की चिंता बढ़ाने वाली एक खबर इससे पहले 27 अप्रैल को आई थी, जब तुर्की का एक C-130 हरक्यूलिस सैन्य विमान कराची पहुंचा था। तुर्की ने इसे एक सामान्य दौरा कहा लेकिन इसमें हथियार आने का दावा कुछ रिपोर्ट में किया गया है। एक उच्च-स्तरीय तुर्की सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में पाकिस्तान वायु सेना के मुख्यालय का दौरा भी किया है।

तुर्की और पाकिस्तान की करीबी पर भारत की नजर लगी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को तुर्की को कूटनीतिक, रणनीतिक और वैश्विक स्तर पर घेरना चाहिए क्योंकि अब यह साफ हो गया है कि तुर्की किस खेमे में खड़ा है। तुर्की ने हालिया वर्षों में रक्षा उद्योग में काफी तरक्की की है। ऐसे में तुर्की से पाकिस्तान को आधुनिक हथियारों का मिलना निश्चित ही भारत की परेशानी बढ़ाएगा।

सात साल में बढ़ा सहयोग
तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग 2018 के बाद से काफी बढ़ा है। साल 2018 में पाकिस्तान ने तुर्की की सरकारी रक्षा कंपनी ASFAT के साथ 1.5 अरब डॉलर का समझौता किया था। इसके तहत तुर्की पाकिस्तान को चार MILGEM-क्लास के युद्धपोत देगा। इस समझौते में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शामिल है, इसके तहत दो युद्धपोत कराची शिपयार्ड में बनाए जाएंगे।

तुर्की की रक्षा इंडस्ट्री पाकिस्तानी फौज को आधुनिक बनाने में मदद कर रही है। पाकिस्तान की वायु सेना को तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज से F-16 फाइटिंग फाल्कन जेट मिले हैं। दोनों देश हेलीकॉप्टर और ड्रोन के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। पाकिस्तान की सेना में तुर्की के TB2 ड्रोन और केमानकेस क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। पाकिस्तान की हवाई ताकत बढ़ाने में तुर्की का बड़ा योगदान है।

कश्मीर मुद्दे पर तुर्की की बयानबाजी
रक्षा के अलावा तुर्की और पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे पर साथ हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को तुर्की से बड़ा सहारा मिला है। इसी साल फरवरी में एर्दोगन ने तुर्की के कश्मीरियों के साथ खड़े होने की बात कही थी। तुर्की और पाकिस्तान ने संबंध बेहतर करने के लिए लिए हाईलेवल स्ट्रैटेजिक कॉपरेशन काउंसिल बनाया है। खुद एर्दोगन 2003 से अब तक कम से कम 10 बार पाकिस्तान जा चुके हैं।

भारत ने तुर्की और पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती को देखते हुए अपनी विदेश नीति में बदलाव किया है। भारत उन देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है, जो तुर्की के विरोधी हैं। पूर्वी भूमध्य सागर में भारत ने ग्रीस और साइप्रस के साथ अच्छे संबंध बनाए हैं। भारत ने उत्तरी साइप्रस में तुर्की के दावों के खिलाफ साइप्रस गणराज्य का भी समर्थन किया है।

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