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पिता रूसी सेना में कर्नल, बेटा यूक्रेनी सिपाही… आमने-सामने लड़ रहे जंग

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नई दिल्ली,

रूस ने इस साल 24 फरवरी को यूक्रेन पर धावा बोल दिया था. यूं तो यह एक देश का दूसरे देश पर किया गया हमला था, लेकिन इस फैसले के बाद एक बेटा अपने पिता के खिलाफ ही हथियार उठाने को मजबूर हो गया. पुतिन के हमले के ऐलान के बाद यूक्रेन के 27 साल के आर्तुर (Artur) ने अपनी मातृभूमि यूक्रेन की रक्षा के लिए हथियार उठा लिए थे. लेकिन यह आर्तुर ने यह हथियार रूस के खिलाफ ही नहीं बल्कि अपने पिता के खिलाफ भी उठाया. आर्तुर के पिता ओलेग पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थित अलगाववादी सेना में कर्नल हैं.

युद्ध शुरू होने पर ओलेग ने बेटे आर्तुर से कहा था कि बेहतर होगा कि वह हथियार नहीं उठाए क्योंकि रूस के सामने यूक्रेन ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं है. लेकिन आर्तुर पिता की बात को नजरअंदाज करते हुए यूक्रेन की सेना में भर्ती हो गया और उत्तरी एवं पूर्वी यूक्रेन में रूस के खिलाफ मोर्चा खोल लिया.

आर्तुर को पिछले महीने यूक्रेन द्वारा रूस के चंगुल से आजाद कराए गए शहरों इजियम और लाइमैन में भी देखा गया. वह अपने देश की रक्षा के लिए पिता के खिलाफ हथियार उठाने से भी हिचक नहीं रहा. लेकिन इस बीच वह फोन के जरिए रूस के कब्जे वाले दोनेत्सक में अपने पिता के संपर्क में भी है. दोनों के बीच टेक्सट के जरिए बातचीत होती है.

मातृभूमि यूक्रेन की रक्षा के लिए पिता के खिलाफ हथियार उठाए
एक युद्ध में अलग-अलग मोर्चों से लड़ रहे बाप-बेटे के इस फैसले पर आर्तुर कहते हैं, हम बेशक युद्ध में अलग-अलग मोर्चों से लड़ रहे हैं. लेकिन हममें से सिर्फ एक ही सही के साथ खड़ा है. इसमें कोई शक नहीं है कि यूक्रेन पर रूस के हमले ने हजारों परिवारों को बर्बाद किया है. अतीत की वजह से दोनों देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. इस वजह से रूस में रह रहे कई यूक्रेनी लोगों के रिश्तेदार असमंजस में भी हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू होने के तुरंत बाद कुछ यूक्रेनी लोगों के रूसी रिश्तेदारों ने यह मानने से इनकार कर दिया कि पुतिन की सेना यूक्रेन में बम बरसा रही है.दरअसल रूस और यूक्रेन दोनों ही सोवियत संघ के विघटन से उपजे देश हैं.

पिता 2016 में रूसी सेना में शामिल हुए
आर्तुर यूक्रेन के ऐसे जवान हैं, जिनके पिता रूस की ओर से लड़ रहे हैं. आर्तुर का जन्म कीव के पास बोरिस्पिल में सैन्य परिवार में हुआ था. उनके पिता ओलेग पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्सक इलाके से हैं, जो खुद 2011 तक यूक्रेन सेना में सेवाएं दे चुके हैं.
आर्तुर के मुताबिक, 2011 में आर्तुर की मां से तलाक लेने के बाद ओलेग काम की तलाश में रूस चले गए थे. आर्थिक तंगी से जूझ रहे ओलेग 2016 में रूस समर्थित सेना में शामिल हो गए थे. इसके दो साल बाद ही रूस ने क्रीमिया को यूक्रेन से अलग कर दिया था.

आर्तुर कहते हैं, जब उन्होंने (ओले) मुझे बताया था कि वह रूस समर्थित सेना में शामिल हो रहे हैं तो मैं सकते में था. कई यूक्रेनी लोगों की तरह मेरे लिए भी यह युद्ध 2014 में ही शुरू हो गया था. आर्तुर ने कहा कि रूसी समर्थित सेना में शामिल होने से पहले ही उन्होंने अपने पिता का रूसी समर्थित रुख देख लिया था. वह दरअसल रूसी प्रोपेगैंडा का शिकार हो गए.

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