नई दिल्ली
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीपीईसी को लेकर चीन को जमकर सुनाया है और नसीहत भी दी है। उन्होंने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्र में आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर चीन को इस बात का ध्यान रखा चाहिए कि किसी देश की अखंडता और संप्रभुता को नुकसान ना पहुंचे। एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स की वर्चुअल बैठख में संबोधन के दौरान विदेश मंत्री ने चीन और पाकिस्तान के संबंधों की तरफ इशारा करते हुए खरी खरी सुनाई। बता दें कि इस बैठक की अध्यक्षता चीन ही कर रहा था।
एससीओ की इस बैठक के बाद संयुक्त वार्ता में भी भारत ने चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनेशिएटिव का विरोध किया। जयशंकर ने ट्वीट करके कहा कि एससीओ क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत है जिससे की केंद्रीय एशिया के हितों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने कहा इन कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के बारे में भी ध्यान रखना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन ना हो और सदस्य देशों की संप्रभुता को नुकसान ना पहुंचे।
जयशंकर ने अपने संदेश के दौरान किसी भी देश का नाम नहीं लिया लेकिन स्पष्ट है कि भारत लंबे समय से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का विरोध करता रहा है। यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरना है। भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिसने बीआरआई का विरोध किया है। वहीं कई देशों का कहना है कि चीन ने दूसरे देशों की कंपनियों के लिए इस प्रोजेक्ट में रास्ता नहीं खोला है।
एस जयशंकर ने कहा कि अच्छी कनेक्टिविटी एससीओ क्षेत्र में आर्थिक विकास सुनिश्चित करेगी। ईरान का चाबहार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा, हमारे सदस्यों के बीच कुल 141 अरब डॉलर का ही व्यापार होता है. हालांकि इसको बढ़ाने की जरूरत है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि कोई कदम उठाने से पहले विचार कर लें कि किसी सदस्य देश को नुकसान ना हो।
जयशंकर ने मिशन LiFE के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, यूज ऐंड थ्रो इकॉनमी को सर्कुलर इकॉनमी से रिप्लेस करने की जरूरत है। उन्होंने खाद्यान्न संकट का जिक्र करके कहा कि आपस में तालमेल से ही इस संकट से निपटा जा सकता है। वहीं उन्होंने उन सभी देशों की सराहना भी की जिनहोंने गुजरात के मोरबी में हुए हादसे पर संवेदनाएं व्यक्त की थीं। बता दें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर घटना पर दुख जताया था।
