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पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ खोला दूसरा फ्रंट? लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी से मिले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के अधिकारी

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ढाका

क्या पाकिस्तान ने बांग्लादेश के रास्ते भारत के खिलाफ दूसरा फ्रंट खोल दिया है? क्या अब बांग्लादेश भी पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए भारत के खिलाफ आतंकवादियों को भेजेगा? क्या मोहम्मद यूनुस भी पाकिस्तान की तर्ज पर आतंकवादियों के साथ गलबहियां करेंगे? बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कानूनी सलाहकार डॉ. आसिफ नजरूल ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक बड़े नेता के साथ मुलाकात की है। रिपोर्ट के मुताबिक ये मुलाकात कश्मी के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के ठीक एक दिन बाद हुई है। रिपोर्ट है कि डॉ. आसिफ नजरूल ने LeT के एक बड़े नेता इजहार से मुलाकात की है। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या बांग्लादेश की मौजूदा सरकार, भारत के खिलाफ चरमपंथ को बढ़ावा दे रही है?

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की इस हरकत से भारत के साथ उसके संबंध और तनावपूर्ण हो सकते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ढाका के कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि कट्टरपंथी समूहों और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। हालांकि अभी तक इस मुलाकात के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है।

बांग्लादेश में भी आतंकियों की जमीन तैयार!
LeT का आतंकवादी इजहार पहले भी बांग्लादेश की धरती से आतंकी साजिशें रचता रहा है। उसने 2009 में ढाका में भारतीय उच्चायोग पर हमले की योजना बनाई थी, जो नाकाम हो गई थी। माना जाता है कि इजहार के हिफाजत-ए-इस्लाम से गहरे संबंध हैं। हिफाजत-ए-इस्लाम एक देवबंदी इस्लामी समूह है, जो 2010 में बांग्लादेश में बना था। इजहार पर बांग्लादेश में 25 से ज्यादा आतंकवाद के आरोप हैं। 2009 से ही बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियां उस पर नजर रख रही हैं। इस मुलाकात को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। अगर ये आरोप सही हैं, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। फिलहाल, जांच चल रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

मोहम्मद यूनुस के शासन में आने के बाद अब लश्कर-ए-तैयबा ने बांग्लादेश में अपना विस्तार करना शुरू कर दिया है। इसने कट्टरपंथी युवाओं को जिहाद के नाम पर जोड़ना शुरू कर दिया है। लश्कर-ए-तैयबा ने बांग्लादेश में प्रचार करना तेजी से शुरू कर दिया है। लश्कर-ए-तैयबा की बांग्लादेश में मौजूदगी भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है, क्योंकि इससे पूर्वोत्तर भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बल मिल सकता है। बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर भारत में पाकिस्तान हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी कर सकता है। इसके अलावा आतंकी हमलों की योजनाएं भी तैयार की जा सकती हैं।

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