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चीन को झटका देने की तैयारी में भारत, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में तलाश रहा ये खास चीज

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नई दिल्ली,

लिथियम के लिए चीन पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए भारत ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं. इसी क्रम में भारत ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में इन खनिजों की तलाश कर रहा है. भारत के खनन सचिव वीएल कांता राव ने गुरुवार को कहा कि भारत जाम्बिया, कांगो और ऑस्ट्रेलिया से लिथियम, कोबाल्ट और तांबे जैसे महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच के लिए खनन के मौकों की तलाश कर रहा है.

अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि इन देशों की सरकारें भारतीय राज्य उद्यम संघ (KABIL) के साथ मिलकर काम कर रही हैं.उन्होंने कहा, ‘हम इन देशों में अपने राजनयिक मिशन के जरिए महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उनके खनन की कोशिश कर रहे हैं.’

क्यों महत्वपूर्ण हैं क्रिटिकल मिनरल्स?
स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उत्पादन के लिए क्रिटिकल मिनरल बेहद महत्वपूर्ण हैं. इनमें कोबाल्ट, तांबा, लिथियम, निकेल और रेयर अर्थ मिनरल्स शामिल हैं.अधिकारी कांता राव ने बताया कि जाम्बिया सरकार ने हाल ही में भारत को कोबाल्ट और तांबे की खोज के लिए 9,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र देने पर सहमति जताई है. उन्होंने बताया कि कोबाल्ट और तांबे की खोज प्रक्रिया में दो से तीन साल लगने की उम्मीद है. सरकार को उम्मीद है कि खोज के बाद इन महत्वपूर्ण धातुओं के खनन का अधिकार भारत को मिल जाएगा.

क्रिटिकल मिनरल्स पर नजर रखने वाले लोगों के अनुसार, जैसे-जैसे दुनिया स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, लिथियम की मांग बढ़ रही है. इस संदर्भ में, भारत इन खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है. खासकर चीन से जो वर्तमान में लिथियम प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर पर हावी है.

क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भारत का निवेश
जनवरी में, भारत सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता के लिए 1.9 अरब डॉलर नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन को मंजूरी दी थी.खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा था कि लिथियम ब्लॉक की मांग बहुत ज्यादा है और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कई लिथियम भंडार की पहचान की है. उन्होंने कहा कि भंडार को लेकर और अधिक जानकारी अप्रैल या मई के अंत तक आने की उम्मीद है. इसके बाद लिथियम भंडार की नीलामी की जाएगी.

चीन से कितना लिथियम खरीदता है भारत?
भारत महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में लगा हुआ है, क्योंकि घरेलू स्तर पर इनकी पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं है. लिथियम की वैश्विक आपूर्ति में वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया और “लिथियम त्रिभुज” का वर्चस्व है, जिसमें चिली, अर्जेंटीना और बोलीविया शामिल हैं. इन देशों के पास कुल मिलाकर दुनिया के 75% से अधिक लिथियम भंडार हैं. इनमें से अधिकांश लिथियम प्रोसेसिंग के लिए चीन सप्लाई की जाती है.

चीन भारत की शीर्ष लिथियम सप्लायर है जो भारत के कुल इस्तेमाल का करीब 70% लिथियम देता है. लिथियम को लेकर चीन पर भारत की निर्भरता चिंता का विषय है क्योंकि सीमा विवाद को लेकर चीन के साथ रिश्ते तनावपूर्ण बने रहते हैं. इसे देखते हुए भारत लिथियम को लेकर चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है.

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