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ईरान, चीन और रूस की नौसेना का चाबहार बंदरगाह के पास संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, ओमान की खाड़ी से ट्रंप को सख्त संदेश!

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तेहरान

ईरान, चीन और रूस की नेवी ओमान की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रही हैं। तीनों देशों ने सोमवार से अपना ये सालाना अभ्यास शुरू किया है। हालिया वर्षों में ईरान, चीन और रूस ने सैन्य संबंधों को लगातार मजबूत किया है, ये अभ्यास इसी दिशा में एक कदम है। ईरानी बंदरगाह चाबहार के पास हो रहे इस अभ्यास को ‘सिक्योरिटी बेल्ट-2025 नाम दिया गया है। ईरान, चीन और रूस का ये पांचवां संयुक्त नौसैनिक अभ्यास है, जिसकी शुरुआत 2019 में हुई थी।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्लेषकों का मानना है कि यह अभ्यास तीनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी का प्रतीक है। तीनों ही देश अमेरिकी प्रभाव कम करने और पश्चिमी नेतृत्व वाले वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान, चीन और रूस को अमेरिका विरोधी ताकतों के तौर पर देखा जाता है। इस साल यह अभ्यास और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यूक्रेन मुद्दे पर ट्रंप के यूरोपीय देशों से संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं।

रूस-चीन ने भेजे लड़ाकू जहाज
रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि इस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में 15 लड़ाकू जहाज, सहायक पोत, गनबोट और हेलीकॉप्टर शामिल हैं। रूस का प्रतिनिधित्व रेज्की और रूसी हीरो एल्डार त्सिदेनजोपोव कोरवेट और पैसिफिक फ्लीट के पेचेनेगा टैंकर कर रहे हैं। चीन ने अभ्यास में भाग लेने के लिए टाइप 052D गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक बाओटौ और आपूर्ति जहाज गाओयूहू को तैनात किया है।

चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि सैन्य विश्वास बढ़ाने और व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने के मकसद से इस अभ्यास में समुद्री लक्ष्यों पर नकली हमले, विजिट-बोर्ड-सर्च-सीजर ऑपरेशन और खोज-बचाव की एक्सरसाइज शामिल होगी। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया है कि ईरान ने एक स्टेल्थ मिसाइल कोरवेट और एक गश्ती जहाज इस ज्वाइंट ड्रिल के लिए भेजा है।

अमेरिका की बढ़ेगी चिंता!
ईरान, चीन और रूस के इस अभ्यास के बारे में पूछे जाने पर रविवार को ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा कि वह इन तीनों अमेरिकी विरोधियों की ओर से हो रहे शक्ति प्रदर्शन से चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम उन सभी से मजबूत हैं। हमारे पास उन सभी से ज्यादा ताकत है। हालांकि अमेरिका में चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के बीच उभरती रणनीतिक साझेदारी पर चिंता दिखी है। अमेरिकी सांसदों ने इस गठबंधन को ‘तानाशाहों का धुरी’ बताया है।

ओमान की खाड़ी में यह अभ्यास अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हो रहा है। ट्रंप ने ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति अपनाई है। ट्रंप की ओर से तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के प्रयास में उसके तेल निर्यात को शून्य तक कम करने के प्रयास शामिल हैं। ईरान ने ट्रंप के इस कदम को ‘बदमाशी’ कहते हुए नाराजगी जताई है।

ओमान की खाड़ी में बढ़ सकती है तनातनी
ओमान की खाड़ी हिंद महासागर और होर्मुज जलडमरूमध्य को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। यहां से दुनिया के एक-चौथाई से अधिक समुद्री व्यापारिक तेल गुजरता है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति बनाए हुए है। अमेरिका का सैन्य बेड़ा बहरीन में है। यह अभ्यास अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भेजता है कि ईरान और रूस भी इस क्षेत्र में दबदबा बनाने की चाह रखते हैं।

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