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मोदी से लेकर जिनपिंग तक पहुंचे, पुतिन ने इस डर से जाने से किया इनकार?

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नई दिल्ली,

इंडोनेशिया के बाली में हो रही जी-20 समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत सभी देशों के प्रमुख पहुंचे, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इससे दूरी बनाए रखी. इससे पहले भी पुतिन आखिरी बार साल 2014 में जी-20 समिट में नजर आए थे. उस समय अधिकतर वैश्विक नेताओं ने पुतिन से दूरी बनाई थी, क्योंकि समिट से कुछ वक्त पहले उन्होंने यूक्रेन के हिस्से क्रीमिया का रूस में विलय कर लिया था.

पुतिन के इस कदम पर कई देशों ने नाराजगी जताई थी. ऐसे में जब पुतिन G20 बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे तो वहां उन्हें अलग-थलग कर दिया गया. पुतिन ज्यादा समय तक समिट में नहीं रुके और जल्द ही रूस लौट गए. अब आठ साल बाद जब पुतिन ने यूक्रेन के साथ जंग छेड़ी हुई है और कई देशों के प्रतिबंध झेल रहे हैं, ऐसे में उन्होंने बाली में आयोजित G20 मीटिंग से दूरी बनाई है.

पुतिन की निंदा नहीं चाहती रूसी सरकार
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूसी सरकार नहीं चाहती है कि पुतिन सबकी आलोचनाएं झेलें. इसी वजह से पुतिन इंडोनेशिया में हो रही जी 20 समिट में शामिल नहीं हो रहे हैं. हालांकि, पुतिन को इससे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि पहले ही रूस कई सारे पश्चिमी देशों के प्रतिबंध झेल रहा है.

डायलॉग ऑफ सिविलाइजेशन इंस्टीट्यूट के चीफ रिसर्च एलेक्सी मलाशेंको ने एक वेबसाइट से इस बारे में कहा कि पुतिन एक बार फिर किसी सार्वजनिक मंच पर अपमानित नहीं होना चाहते हैं. एलेक्सी ने साल 2014 की समिट के बारे में बात करते हुए कहा कि जो सभी देशों के प्रमुखों का फोटो लिया गया था, उसमें भी पुतिन को अलग-थलग कर दिया गया था.

एलेक्सी ने आगे कहा कि जब कोई समिट हो रही है तो उसमें आपको दूसरे लोगों से बात करनी होती है और फोटो खिंचाने होते हैं. और इसमें यह गौर करने वाली बात होती है कि कौन किस आदमी से बात कर रहा है और वह दोनों किसी तरह से फोटो खिंचवा रहे हैं.

सबको पता है कि पुतिन का क्या पक्ष है
रूस में ग्लोबल अफेयर जनरल के एडिटर, विदेश नीतियों के एक्सपर्ट और क्रेमलिन के करीबी Fyodor Lukyanov ने संकेत दिया कि पुतिन यूक्रेन मामले में अपना रुख बदलने के लिए तैयार नहीं हैं. एक्सपर्ट ने आगे कहा कि पुतिन का पक्ष सभी को अच्छे से पता है और यह बदलेगा भी नहीं. दूसरे पक्ष का रुख भी सभी को पता है, ऐसे में जी-20 समिट जाने का क्या फायदा है.

हैरान करने वाली बात है कि रूसी सरकार ने पुतिन के समिट में न शामिल होने के पीछे कोई ठोस वजह नहीं बताई. साथ ही यह भी कह दिया गया कि पुतिन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए भी समिट में हिस्सा नहीं लेंगे. दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की वर्चुअल जरिए से समिट का हिस्सा बनेंगे और वैश्विक नेताओं से रूस को कड़ा जवाब देने के लिए बातचीत करेंगे.

पुतिन के पास कहने के लिए कुछ नहीं है
राजनीतिक विशेषज्ञ कॉन्स्टैनटिन कालाचेव ने कहा कि पुतिन के जी-20 समिट दूरी बनाने से साफ है कि वह यूक्रेन से जंग में इतना आगे बढ़ गए हैं कि अब पीछे नहीं हट सकते हैं. राजनीतिक विशेषज्ञ ने आगे कहा कि पुतिन के पास कहने के लिए कुछ नहीं है. यूक्रेन को लेकर पुतिन के पास कोई ऐसा प्रस्ताव नहीं है, जो दोनों पक्षों को शांत कर पाए.

मालूम हो कि सितंबर में बड़ी संख्या में सेना रिजर्व बढ़ाने के बावजूद पिछले कुछ समय में ही रूसी सेना को यूक्रेन में सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा है. सितंबर में रूसी सेना को खार्कीव के उत्तरी-पूर्व क्षेत्र से भी कब्जा छोड़ना पड़ा था. वहीं शुक्रवार को रूस ने ऐलान किया कि वह खेरसॉन के कब्जे वाले हिस्से से सेना को हटा रहा है.

दूसरी ओर, अधिकतर पश्चिमी देशों के नेताओं से अलग-थलग होने के बाद पुतिन उन देशों से रूस के रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं, जिनके साथ पहले से अच्छे संबंध रहे हैं, या जो वैश्विक मामलों में अमेरिकी प्रभाव के खिलाफ हैं.ऐसे में अधिकतर पश्चिमी देशों के नेताओं से अलग-थलग होने के बाद पुतिन उन देशों से रूस के रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं, जिनके साथ पहले से अच्छे संबंध रहे हैं, या जो वैश्विक मामलों में अमेरिकी प्रभाव के खिलाफ हैं.

आर. पोलिटिक के फाउंडर टटियाना स्टेनोवया (Tatiana Stanovaya) ने इस बारे में कहा कि पुतिन के नजरिए से उनका जी 20 समिट में ना जाना रूस के तटस्थ देशों से बढ़ते रिश्तों में बाधा नहीं बनेगा. पुतिन का मानना है कि रूस की जो एंटी अमेरिका लाइन है, अब उसे काफी समर्थन मिलने लगा है. स्टेनोवया ने आगे कहा कि पुतिन एंटी वेस्टर्न गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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