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खाड़ी देशों में ईरान की जगह ले रहा सऊदी अरब, ट्रंप के आने से मोहम्मद बिन सलमान की बल्ले-बल्ले

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रियाद

मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के नेतृत्व में सऊदी अरब हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। इसका ताजा सबूत हाल में ही लेबना और सीरिया में देखने को मिला है। इन दोनों देशों में सऊदी अरब, ईरान के छोड़े गए जगह को तेजी से भर रहा है। लेबनान के सेना प्रमुख जोसेफ औन को इस महीने अपना अगला राष्ट्रपति चुने जाने के कुछ ही समय बाद, उत्तरी प्रांत अक्कर में एक इमारत के सामने उनके और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विशाल बैनर लगाए गए। इन बैनरों में प्रिंस सलमान को “अरबों का नेता” बताया गया।

मध्य पूर्व का विजेता बना सऊदी अरब
तेल से समृद्ध सऊदी अरब और उनके 39 वर्षीय नेता मोहम्मद बिन सलमान गाजा में 15 महीने से चल रहे संघर्ष के नतीजों में सबसे बड़े विजेताओं में से एक के रूप में उभर रहे हैं, जिन्होंने मध्य पूर्व में सत्ता के संतुलन को उसके पुराने प्रतिद्वंद्वी ईरान के खिलाफ झुका दिया है। रविवार को इजरायल और हमास के बीच एक नाजुक युद्धविराम समझौते के प्रभावी होने के बाद गाजा में ईरान का प्रभाव फिलहाल कम हो गया है। इतना ही नहीं, लेबनान और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में ईरान के प्रॉक्सी खत्म हो गए हैं। सीरिया से ईरान के सहयोगी बशर अल-असद को सत्ता से हटा दिया गया है।

सऊदी अरब ने ईरान की जगह कब्जाई
लंदन स्थित थिंक टैंक चैथम हाउस द्वारा पिछले सप्ताह आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट में अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव के उपाध्यक्ष पॉल सलेम ने कहा, “यह वास्तव में ईरान के लिए एक करारा झटका है।” कई दूसरे विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब सीधे-सीधे ईरान से तनाव मोल नहीं लेना चाहता है। वह सिर्फ मध्य पूर्व में अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहता है। सऊदी अरब लेबनान और सीरिया में राजनीतिक बदलावों को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, और गाजा में “अगले दिन” के लिए तैयार है।

इजरायल-हमास युद्ध से सऊदी को लगा था झटका
7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले के कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रणनीतिक परिवर्तन हुआ है। इसने इजरायल और सऊदी अरब के बीच होने वाली दोस्ती को भी तोड़ दिया था। इससे पहले तक सऊदी अरब अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने को तैयार था। इसके बदले सऊदी अरब को अमेरिका नाटो जैसे सहयोगी देश का दर्जा देने वाला था। इसे सऊदी अरब की सुरक्षा में अभूतपूर्व इजाफा होता और पूरे मध्य पूर्व में उसका वर्चस्व और ज्यादा बढ़ता।

ट्रंप की वापसी से सऊदी की उम्मीदें बढ़ी
अब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति के रूप में फिर से लौटने के बाद सऊदी अरब और इजरायल की दोस्ती की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस बीच हमास और इजरायल में गाजा युद्ध विराम समझौता भी हुआ है। इसके तहत दोनों पक्ष एक दूसरे के बंदियों को रिहा कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि ट्रंप के नेतृत्व में इजरायल और सऊदी अरब अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर कर राजनयिक संबंधों को बहाल करेंगे।

 

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