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ताइवान का अमेरिका से हथियार खरीदने का फैसला, रक्षा बजट भी बढ़ाया, चीन से आर-पार के मूड में चिंगते!

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ताइपे

ताइवान ने अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने का फैसला लिया है। ताइवान आने वाले समय में अमेरिका से हथियार खरीद बढ़ाएगा। साथ ही अपने रक्षा खर्च में भी ताइवान बढ़ोत्तरी करने जा रहा है। ताइवान की ओर से ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब चीन के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से हालिया समय में ऐसे बयान आए हैं, जिनमें उन्होंने ताइवान पर सैन्य हमले का संकेत दिया गया है। इससे ताइवान की चिंता बढ़ी हुई है और वह हथियार खरीद से अपनी सेना को मजबूत करना चाहता है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान के उप विदेश मंत्री फ्रांस्वा चिहचुंग वू ने एक इंटरव्यू में कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ करीबी सुरक्षा संबंध चाहता है। वू ने कहा कि रक्षा बजट बढ़ाने का मतलब है कि अमेरिका से और हथियार खरीदे जाएंगे क्योंकि यूरोपीय देश ताइवान को हथियार बेचने को तैयार नहीं हैं। यहां तक कि जापान भी अपने हाथ खींचता दिख रहा है। साथ ही ताइवान अब अपने जीडीपी का 3 फीसदी रक्षा पर खर्च करेगा। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंगते ने फरवरी में इसका ऐलान किया है।

ताइवान के लिए अहम सहयोगी है अमेरिका
वू ने दोनों देशों के रिश्ते पर कहा कि अगर ताइवान के राष्ट्रपति की डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होती है तो इसे सकारात्मक कूटनीतिक घटना माना जाएगा। साल 1979 में अमेरिका ने ताइपे की जगह बीजिंग को मान्यता दी थी। इस वजह से अमेरिका के ताइवान के औपचारिक संबंध नहीं हैं। हालांकि अमेरिका लंबे समय से ताइवान का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक सहयोगी है।

ताइवान चीन के साथ बढ़ते तनाव के कारण अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वे अमेरिका से हथियार खरीदना चाहते हैं। इससे चीन को संदेश जाएगा कि ताइवान पर हमला करना आसान नहीं होगा। पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि ताइवान को अपनी रक्षा पर अधिक खर्च करना चाहिए।

वू ने चीन पर सेमीकंडक्टर निर्यात नियंत्रण को लेकर अमेरिका के प्रयासों पर भी बात की है। वू ने कहा कि हमें तालमेल बिठाना होगा क्योंकि ताइवान अमेरिका के फैसलों को चुनौती नहीं दे सकता। अमेरिका ने हाल ही में नए नियम लागू किए हैं, जो TSMC और दूसरी कंपनियों के एडवांस्ड चिप्स चीन तक पहुंचने से रोकने के लिए हैं। इस नीति का ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) पर असर होगा। TSMC दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी है।

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