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बाकी उलझे हैं, चीन खेल रहा खेल… एक्‍सपर्ट ने बताई ड्रैगन की असली ताकत, भारत के लिए क्‍या संकेत?

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नई दिल्‍ली

चीन दशकों से दुनिया का कारखाना कहलाता था। लेकिन, अब वह नई पहचान बना रहा है। फाइनेंशियल एनालिस्‍ट हार्दिक जोशी का कहना है कि चीन की असली ताकत सिर्फ सामान बनाने में नहीं है। अलबत्‍ता, पैसे को कंट्रोल करने में है। जोशी ने लिंक्‍डइन पर एक पोस्ट में यह बात कही। उनका कहना है कि चीन लंबी अवधि की योजनाएं बना रहा है, जबकि बाकी देश सिर्फ थोड़े समय के मुनाफे के बारे में सोचते हैं।

चीन दुनिया पर अपनी वित्तीय पकड़ मजबूत कर रहा है। अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 2023 में 34 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया। लेकिन, चीन अभी भी उसे कर्ज देने वाले सबसे बड़े देशों में शाम‍िल है। उसके पास 3.2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार भी है। इससे उसे दुनिया के बाजारों पर प्रभाव डालने का मौका मिलता है। चीन के बैंक अब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से भी ज्यादा संपत्ति को कंट्रोल करते हैं। इससे उसकी वित्तीय ताकत उसकी सीमाओं से बाहर भी बढ़ रही है।

असली योजना कहीं ज्यादा बड़ी
जोशी लिखते हैं, ‘यह (चीन) सिर्फ एक अर्थव्यवस्था नहीं है, यह एक वित्तीय साम्राज्य बन रहा है।’ उनका कहना है कि बहुत से लोग अभी भी चीन को सिर्फ एक ऐसा देश मानते हैं जो सामान बेचता है। लेकिन, उसकी असली योजना इससे कहीं ज्यादा बड़ी है।

चीन सिर्फ सामान नहीं बेच रहा है, बल्कि देशों को पैसा दे रहा है। श्रीलंका, पाकिस्तान और अफ्रीका के कुछ हिस्से अब चीन से लिए गए कर्ज पर निर्भर हैं। इससे चीन सिर्फ एक व्यापारिक भागीदार नहीं रह गया है, बल्कि एक ऐसा कर्जदाता बन गया है जो उनके आर्थिक फैसलों को भी प्रभावित कर सकता है।

धीमे-धीमे हर चीज पर कंट्रोल बना रहा है
पश्चिमी देश हर तीन महीने में होने वाले मुनाफे के बारे में सोचते हैं। लेकिन, चीन 50 साल की योजनाएं बनाता है। उसने दुनिया के 70% दुर्लभ खनिज पदार्थों पर कंट्रोल कर लिया है। इससे वह भविष्य के उद्योगों जैसे कि EVs (इलेक्ट्रिक वाहन) और सेमीकंडक्टर पर अपना दबदबा बना सकता है। चीन बुनियादी ढांचे में भी निवेश कर रहा है। वह यूरोप, अफ्रीका और एशिया में बंदरगाहों, रेलवे और टेलीकॉम नेटवर्क को खरीद रहा है।

जोशी कहते हैं, ‘दुनिया चीन के कारखानों के बारे में बात करती रहती है, लेकिन असली कहानी चीन की वित्तीय रणनीति है।’ ज्यादातर देश आर्थिक बदलावों पर प्रतिक्रिया करते हैं। लेकिन, चीन निवेश करता है, जमा करता है और अपना दबदबा बनाता है। जोशी पूछते हैं कि क्या बाकी देश गलत खेल में उलझे हुए हैं और यह नहीं देख पा रहे हैं कि असल में क्या हो रहा है।

भारत के ल‍िए क्‍या संकेत?
चीन की रणनीति लंबी अवधि की है। वह दुनिया में अपनी वित्तीय ताकत बढ़ा रहा है। भविष्य के उद्योगों पर नियंत्रण कर रहा है। दूसरे देशों खासकर भारत को यह समझने की जरूरत है कि चीन क्या कर रहा है, ताकि वो भी अपनी आर्थिक रणनीति बना सके। एशिया में चीन का सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी भारत ही है। ऐसे में यह और भी ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण हो जाता है कि वह चीन की हर रणनीति पर नजर रखे।

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