3.9 C
London
Saturday, February 14, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयब्रह्मोस के हाइपरसोनिक वेरिएंट में शामिल होगी जिरकॉन मिसाइल की तकनीक, चीन-पाक...

ब्रह्मोस के हाइपरसोनिक वेरिएंट में शामिल होगी जिरकॉन मिसाइल की तकनीक, चीन-पाक की उड़ेगी नींद

Published on

मॉस्को

भारत और रूस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के नए वेरिएंट को बनाने पर तेजी से काम कर रहे हैं। ब्रह्मोस-2 नाम की यह मिसाइल हाइपरसोनिक स्पीड से चलने में सक्षम होगी। इतना ही नहीं, इस मिसाइल में रूस की सबसे घातक जिरकान मिसाइल की टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। जिरकान दुनिया में सबसे तेज गति से चलने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल है। इसकी स्पीड 6100 किलोमीटर से लेकर 11000 किलोमीटर तक है। वर्तमान में ब्रह्मोस दुनिया की एकमात्र ऐसी मिसाइल है जिसे जमीन, हवा, पानी और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है। इस मिसाइल को भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इस मिसाइल के अलग-अलग वेरिएंट्स की रेंज 300 से 700 किलोमीटर के बीच है।

पांच से छह साल में पहली उड़ान भरेगी ब्रह्मोस-2 मिसाइल
रूसी समाचार एजेंसी तास से बात करते हुए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ अतुल राणे ने कहा कि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के हाइपरसोनिक वेरिएंट ब्रह्मोस-II का काम अडवांस स्टेज में है। इसमें जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ब्रह्मोस-2 की पहली उड़ान पांच से छह साल में आयोजित की जा सकती है। ब्रह्मोस के हाइपरसोनिक वेरिएंट को रूस के रिसर्च एंड प्रोडक्शन एसोसिएशन ऑफ मशीन-बिल्डिंग  और भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) साथ मिलकर विकसित कर रहे हैं।

रूस की जिरकॉन मिसाइल की तकनीक का होगा इस्तेमाल
अतुल राणे ने बताया कि दोनों पक्षों ने हाइपरसोनिक वर्जन के डिजाइन पर काम किया है। उन्होंने कहा कि जब वे (रूस) हमें तकनीक देंगे, तब हम इसे विकसित करेंगे। शुरुआत में, इसके पहले परीक्षण को 2021 और फिर 2024 के लिए निर्धारित किया गया था। हालांकि, इसमें अब काफी देरी हो चुकी है। ऐसे में मुझे लगता है कि इसके पहले परीक्षण में पांच या छह साल का समय जरूर लगेगा। उनसे सवाल पूछा गया कि क्या ब्रह्मोस-2 मिसाइल में जिरकॉन की कुछ विशेषताएं होंगी, तो उन्होंने कहा कि ऐसा संभव है।

ब्रह्मोस-2 का नहीं करेंगे निर्यात
अतुल राणे ने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल का हाइपरसोनिक वेरिएंट बहुत महंगा होगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम ब्रह्मोस हाइपरसोनिक संस्करण का निर्यात नहीं कर पाएंगे। इसका उत्पादन केवल रूस और भारत के लिए किया जाएगा। राणे ने समझाया कि भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था का एक सदस्य होने के नाते 300 किमी (186 मील) से अधिक की दूरी और 500 किलोग्राम से अधिक वजन वाली मिसाइल विकसित कर सकता है, लेकिन इसे किसी तीसरे देश को नहीं सौंप सकता।

Latest articles

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया ‘टाइगर इंटरनेशनल हाफ मैराथन’ का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मुख्य आतिथ्य में शुक्रवार को 'अलवर टाइगर इंटरनेशनल हाफ मैराथन'...

भजनलाल सरकार में राजस्थान के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल: पहली छमाही में ही 50,900 करोड़ के पार पहुँचा आंकड़ा

भोपाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान के निर्यात सेक्टर का निरंतर विकास हो...

छह छंदों के साथ ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य, सरकार ने जारी किए आदेश

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से...

मप्र पुलिस बनेगी ड्रोन पायलट, अपराधियों पर कसेगी नकेल

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस अब आधुनिक तकनीक के साथ कदमताल करने जा रही है। पुलिस...

More like this

वेनेजुएला के राष्ट्रपति को न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश किया

न्यूयॉर्क।वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया गया।...

राष्ट्रपति भवन में पुतिन का भव्य स्वागत

नई दिल्ली।पुतिन का भारत दौरा आज दूसरे दिन भी जारी है। राष्ट्रपति भवन में...

हांगकांग में 35 मंजिलों वाली 8 इमारतें जलकर खाक, 44 लोगों की मौत

हांगकांग।हांगकांग के ताइ पो जिले में एक बड़े रिहायशी कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग...