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अमेरिका-चीन की खींचतान में पिस रहा यह पिद्दी सा देश, ट्रंप का दिमाग सनका तो बदल जाएगा भूगोल

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वॉशिंगटन

अमेरिका और चीन के बीच पनामा नहर को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। चीन की कंपनियां पनामा नहर के किनारे स्थित बंदरगाहों पर कब्जा करना चाहती हैं, जबकि अमेरिका किसी भी हाल में ऐसा होने नहीं देना चाहता। इसे लेकर दोनों ही महाशक्तियों ने पनामा पर दबाव बढ़ा दिया है। पनामा मध्य अमेरिका का एक छोटा सा देश है, जो एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर नियंत्रण रखता है। इस व्यापारिक मार्ग का नाम पनामा नहर है, हालांकि पनामा ने इस नहर का निर्माण खुद नहीं किया है। अमेरिका ने पनामा नहर को बनाकर पनामा सरकार को सौंपा था, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब दोबारा पाना चाहते हैं।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने पिछले महीने संवाददाताओं को बताया कि पनामा के नेतृत्व ने “नहर के दोनों ओर के बंदरगाहों के बारे में बातचीत” शुरू कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि पनामा नहर बंदरगाहों को अमेरिका के नेतृत्व वाले संघ को बेचने पर चीन का गुस्सा दर्शाता है कि कैसे कंटेनर हब मूल्यवान मुद्रा बन गए हैं। चीन ने बाल्बोआ और क्रिस्टोबल टर्मिनलों को खरीदने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया हुआ था।

हांगकांग की कंपनी ने अमेरिकी कंपनी को बेचा बंदरगाह
हांगकांग के सीके हचिसन ने इस महीने 23 देशों में 43 बंदरगाहों को बेच दिया, जिसमें महत्वपूर्ण पनामा नहर में परिचालन भी शामिल है। हालांकि चीन ने शुक्रवार को इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका देश इस सौदे की समीक्षा करेगा और जरूरत होगी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे चैलेंज भी किया जाएगा। चीन ने यह भी कहा है कि अगर संभव हुआ तो वह दोनों पार्टियों को 2 अप्रैल को योजना के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर करने से रोकेंगे।

चीनी मीडिया सौदे की आलोचना क्यों कर रही
चीनी राज्य मीडिया ने पहले ही बाल्बोआ और क्रिस्टोबल के बंदरगाहों की संभावित खरीद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया है। यह सौदा 22.8 बिलियन डॉलर के उस सौदे का हिस्सा है जिसके तहत सीके हचिसन ने 23 देशों में 43 बंदरगाहों का प्रबंधन करने वाली सहायक कंपनियों में अपनी 80% हिस्सेदारी ब्लैकरॉक और ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (जीआईपी) के नेतृत्व वाले संघ को बेचने पर सहमति जताई थी।

पनामा नहर क्यों महत्वपूर्ण है
82 किलोमीटर लंबी पनामा नहर मध्य अमेरिका के बीचों-बीच बहती है। यह नहर प्रशांत और अटलांटिक महासागर को जोड़ने वाली मुख्य कड़ी है। हर साल लगभग 14,000 जहाज इस नहर को अमेरिकी महाद्वीप से यूरोप तक यात्रा के लिए एक शॉर्टकट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस नहर के बनने से पहले उन जहाजों को दक्षिण अमेरिका से होते हुए लंबा और महंगा सफर तय करना पड़ता था।

पनामा नहर को किसने बनाया
ऐतिहासिक रूप से अमेरिका ने प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ने वाली पनामा नहर के निर्माण और प्रशासन में अहम भूमिका निभाई है। इस नहर को बनाने का जिम्मा पहले फ़्रांस को दिया गया था, लेकिन उसके असफल रहने के बाद अमेरिका ने इस परियोजना को पूरा करने के अधिकार हासिल कर लिए। पनामा नहर का निर्माण वर्ष 1914 में पूरा हुआ। वर्ष 1977 तक पनामा नहर का अधिकार अमेरिका के पास ही था, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर इसे पनामा को सौंपने के लिए एक समझौते पर दस्तखत किए थे। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को “मूर्खतापूर्ण” कहा है।

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