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अपनी पूर्व पत्नी को एक पति पूरे जीवन भर… गुजारा भत्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली

अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय मूल के शख्स को अपनी दोनों पत्नियों को भारी भरकम रकम अदा करनी पड़ी है। नवंबर 2020 में उसने अपनी पहली पत्नी को 500 करोड़ रुपये का एलिमनी दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट (SC) ने उसे दूसरी पत्नी को 12 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है। दूसरी पत्नी से उसकी शादी एक साल से भी कम समय तक चली थी।

यह शख्स अमेरिका में एक सफल IT कंसल्टेंसी सर्विस चलाता है। यह मामला शादी और तलाक दोनों के महंगे होने का एक उदाहरण है। शख्स की दूसरी शादी जुलाई 2021 में हुई, जो कुछ ही महीनों में टूट गई। SC में उसने दूसरी शादी को खत्म करने की अपील की। दूसरी पत्नी ने मांग की कि उसे भी पहली पत्नी के बराबर एलिमनी मिले।

जस्टिस बी वी नागरत्ना और पंकज मित्तल की बेंच ने महिला की मांग पर नाराजगी जताई। दूसरी पत्नी पहली पत्नी के बराबर एलिमनी चाहती थी, जबकि पहली पत्नी की शादी कई साल चली थी। वह अपने पति के बराबर संपत्ति भी चाहती थी। जस्टिस नागरत्ना ने 73 पन्नों के फैसले में लिखा, ‘हमें इस बात पर गंभीर आपत्ति है कि लोग एलिमनी या गुजारा भत्ता मांगते समय अपने जीवनसाथी की संपत्ति के बराबर रकम की मांग करते हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने जीवनसाथी की संपत्ति, हैसियत और आय का हवाला देते हैं और फिर उतनी ही रकम की मांग करते हैं जितनी उनके जीवनसाथी के पास है।’ उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जीवनसाथी की संपत्ति अलग होने के बाद कम हो जाए, तो ऐसी मांगें क्यों नहीं की जातीं?

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
बेंच ने कहा कि ‘गुजारा भत्ता का कानून पत्नी को बेसहारा होने से बचाने, उसकी गरिमा बनाए रखने और सामाजिक न्याय देने के लिए है। कानून के अनुसार, पत्नी को यथासंभव वैसी ही जीवनशैली में रहने का अधिकार है जैसी वह अपने वैवाहिक घर में रहती थी जब दोनों साथ रहते थे। लेकिन एक बार जब पति-पत्नी अलग हो जाते हैं, तो पति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह जीवन भर अपनी वर्तमान स्थिति के अनुसार पत्नी का खर्च उठाता रहे। यदि पति अलग होने के बाद जीवन में बेहतर कर रहा है, तो उससे यह कहना कि वह हमेशा पत्नी की स्थिति को अपनी बदलती स्थिति के अनुसार बनाए रखे, उसकी व्यक्तिगत प्रगति पर बोझ डालना होगा।’

‘…अगर अलग होने के बाद वह कंगाल हो गया हो?’
बेंच ने सवाल किया, ‘हमें आश्चर्य है कि क्या पत्नी पति के साथ संपत्ति का बराबर बंटवारा चाहेगी, अगर अलग होने के बाद किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण वह कंगाल हो गया हो?’ यह मामला पति-पत्नी के अलग होने के बाद आर्थिक व्यवस्था के बारे में कई सवाल खड़े करता है। क्या पत्नी को पति की वर्तमान स्थिति के अनुसार गुजारा भत्ता मिलना चाहिए या फिर शादी के दौरान की स्थिति के अनुसार? क्या एलिमनी का मकसद सिर्फ पत्नी को बेसहारा होने से बचाना है या उसे पति की बराबर का हकदार बनाना? यह फैसला आगे आने वाले ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है। इस मामले ने समाज में एलिमनी और तलाक के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है।

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