नई दिल्ली,
दिल्ली नगर निगम चुनाव- 2022 का आज ऐलान हो सकता है. जानकारी के मुताबिक राज्य चुनाव आयोग की ओर से आज शाम 4 बजे निगम भवन, कश्मीरी गेट पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी. इस PC में एमसीडी चुनाव की घोषणा होने की संभावना है.दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों में से अनुसूचित जाति (SC) के लिए 42 सीटें आरक्षित की गई हैं. वहीं महिलाओं के लिए भी 50 फीसदी सीटें आरक्षित रहेंगी. इन सीटों को भी चिन्हित कर लिया गया है.
दिल्ली नगर निगम के वार्डों के परिसीमन के बाद केंद्र सरकार ने 18 अक्टूबर को एक नोटिफिकेशन जारी किया था. नोटिफिकेशन में आयोग ने कहा था कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा संशोधित मतदाता सूची की अंतिम तिथि 1 जनवरी, 2022 है, इसे एमसीडी चुनावों के लिए मतदाता सूची के रूप में माना जाएगा. अधिकारियों ने कहा था कि इसका मतलब है कि जो लोग 1 जनवरी, 2022 तक मतदाता बने, वे ही आगामी एमसीडी चुनाव में अपना वोट डाल सकेंगे.
कैंडिडेट उतारने की ये है पार्टियों की प्लानिंग
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी 60-70 फीसदी सीटों पर निवर्तमान पार्षदों को दोबारा नहीं उतारेगी. वहीं कांग्रेस को MCD चुनाव लड़ने के इच्छुक 1000 हजार लोगों के आवेदन मिले हैं. उधर, आम आदमी पार्टी की ओर से कैंडिडेट के चयन के लिए एक सर्वे कराया जाएगा.
बीजेपी और AAP के बीच वार-पलटवार
आम आदमी पार्टी ने हाल ही में दावा किया था कि 2017 की तरह ही बीजेपी ने भ्रष्टाचार में कथित संलिप्तता के कारण अपने मौजूदा पार्षदों को MCD चुनावों में नहीं उतारने का फैसला किया है.आम आदमी पार्टी के एमसीडी चुनाव प्रभारी दुर्गेश पाठक ने भाजपा पार्षदों पर 35,000 करोड़ रुपये के “हड़पने” का आरोप लगाया था. वहीं दिल्ली बीजेपी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया था कि दुर्गेश पाठक खबरों में बने रहने के लिए इस तरह की कहानियां गढ़ते हैं.
पहले इतनी थी वार्डों की संख्या
दिल्ली में 1 जनवरी 2022 तक करीब 1.48 करोड़ मतदाता थे. गृह मंत्रालय (MHA) ने बीते मंगलवार को एमसीडी के परिसीमन के बाद नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसके बाद एमसीडी चुनाव को लेकर रास्ता साफ हो गया था. गृह मंत्रालय द्वारा जारी 800 पन्नों के नोटिफिकेशन में कहा गया कि दिल्ली में नगर निगम के वार्डों की संख्या अब 250 होगी. नगर पालिका के एकीकरण से पहले 70 विधानसभा क्षेत्रों में 272 वार्ड हुआ करते थे.
निगमों का एकीकरण
दिल्ली में इस बार सरकार ने निगमों का एकीकरण कर दिया है. हालांकि निगम और सशक्त हो, जनता को ज्यादा लाभ मिले इसके प्रावधान एमसीडी एकीकरण एक्ट में नहीं हैं. इसके अलावा एक्ट में निगम के दिवालिया होने की वजह, पार्षदों और मेयर को पावरफुल बनने या मिलने वाले नए अधिकारों का कोई जिक्र नहीं है.
