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दो साल में 75% तक घटे कुत्तों के हमले, अब कितने और क्यों बढ़ने लगे हैं?

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नई दिल्ली,

– गाजियाबादः इंदिरापुरम में 11 साल की बच्ची पर कुत्तों के झुंड ने किया हमला
– मध्य प्रदेशः 5 साल की बच्ची पर आवारा कुत्तों का हमला, मासूम की मौत
– ग्रेटर नोएडाः ड्यूटी के पहले दिन ही कुत्ते ने गार्ड को काटकर किया घायल

ये सिर्फ तीन हेडलाइन हैं, जो आवारा कुत्तों के आतंक को बयां करती हैं. देश में ऐसी हर रोज साढ़े चार हजार से ज्यादा घटनाएं होती हैं. आवारा ही नहीं, बल्कि पालतू कुत्ते भी आक्रामक होते जा रहे हैं. नोएडा में नई पॉलिसी लाई गई है. अब यहां अगर पालतू कुत्ता किसी को काटता है तो मालिक को 10 हजार रुपये का जुर्माना तो देना ही होगा, साथ में पीड़ित का इलाज भी करवाना होगा. गुरुग्राम में भी कुत्तों की 11 विदेशी नस्लों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

इसी साल 26 जुलाई को लोकसभा में सरकार ने आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं से जुड़े आंकड़े दिए थे. सरकार के मुताबिक, देश में 2019 में आवारा कुत्तों के काटने की 72.77 लाख घटनाएं हुई थीं. 2020 में ये कम होकर 46.33 लाख हो गईं. 2021 में तो ये 17 लाख के आसपास आ गईं. लेकिन इस साल जुलाई तक 14.50 लाख घटनाएं हो चुकी हैं. यही ट्रेंड रहा तो इस साल आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं 20 लाख के ऊपर जा सकती हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, इस साल कुत्तों के काटने की सबसे ज्यादा घटनाएं तमिलनाडु (2.51 लाख) में हुई हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र में 2.31 लाख, पश्चिम बंगाल में 1.33 लाख, आंध्र प्रदेश में 1.15 लाख घटनाएं हुई हैं. यूपी में जहां 2019 में 20.23 लाख घटनाएं हुई थीं, वो इस साल जुलाई तक घटकर 7,180 पर आ गईं.

पर कुत्तों के काटने की घटनाएं एकाएक कम कैसे हुईं? जवाब शायद ये है कि 2020 और 2021 का ज्यादातर समय कोरोना लॉकडाउन या फिर कई सारी पाबंदियों में गुजर गया. इस दौरान लोग भी कम ही बाहर निकले. पाबंदियां हटना शुरू हुईं तो हमले फिर बढ़ गए.

हर दिन 19 हजार से ज्यादा हमले
देश में बढ़े कुत्तों के आतंक के देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूरबर को एनिमल वेलफेयर बोर्ड से सबसे ज्यादा कुत्तों की तबाही से परेशान राज्य और प्रमुख शहरों के 7 साल के आंकड़े मांगे थे.इन आंकड़ों में बताया गया कि साल 2021 में कुत्तों समेत दूसरे जानवरों ने हर दिन औसतन 19,938 लोगों पर हमला किया या उन्हें काटकर नुकसान पहुंचाया.

कुत्तों का काटना, कितनी चिंता की बात
हर 5 साल में मवेशियों और आवारा जानवरों की गिनती होती है. आखिरी बार 2019 में गिनती हुई थी. इसके मुताबिक, देश में आवारा कुत्तों की संख्या 1.53 करोड़ है. 2012 की तुलना में 2019 में आवारा कुत्तों की संख्या में कमी आई है. 2012 में आवारा कुत्तों की आबादी 1.71 करोड़ से ज्यादा थी.

इन आवारा कुत्तों में से ज्यादातर का वैक्सीनेशन नहीं होता है. ऐसे में अगर ये किसी को काटते हैं, तो उसे रेबीज फैलने का खतरा बढ़ जाता है. वैसे तो रेबीज सिर्फ कुत्ते ही नहीं, बल्कि और दूसरे जानवरों के काटने से भी फैलता है. लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में रेबीज के 96% मामले कुत्तों के काटने से सामने आते हैं.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यानी WHO की रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ सालों में दुनियाभर में रेबीज के मामले बढ़े हैं. जबकि 99 फीसदी लोगों को ये बीमारी कुत्तों के काटने से हो रही है. WHO के मुताबिक, हर साल दुनिया में रेबीज से जितनी मौतें होती हैं, उनमें से 36% मौतें सिर्फ भारत में ही होती हैं. यानी, रेबीज से होने वाली हर 100 में से 36 मौत भारत में होती हैं.

WHO का अनुमान है कि भारत में हर साल रेबीज से 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है. सरकार ने 2030 तक भारत को रेबीज-फ्री बनाने का टारगेट सेट किया है. लेकिन भारत में रेबीज को लेकर वैक्सीनेशन अभी बहुत बड़े पैमाने पर नहीं होता है.

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