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आर्टिकल 370 से लेकर चुनावी बॉन्ड तक, सुप्रीम कोर्ट के जज रहते हुए नए CJI संजीव खन्ना ने सुनाए ये 5 अहम फैसले

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नई दिल्ली

सीजेआई चंद्रचूड़ के रिटायर होने के बाद आज जस्टिस संजीव खन्ना ने देश नए चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। जिसके बाद अब वो देश के 51 वें चीफ जस्टिस बन गए हैं। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के खून में ही वकालत है। दरअसल उनके पिता देवराज खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे हैं जबकि उनके चाचा हंसराज खन्ना सुप्रीम कोर्ट के जज थे। उन्होंने भी इसी दिशा में अपना करियर बनाने की ठानी और 1983 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की।

इसके बाद संजीव खन्ना ने दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट से वकालत शुरू की। उसके बाद साल 2005 में वो दिल्ली हाईकोर्ट के जज बन गए। हाई कोर्ट के जज से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने के इस सफर में उन्होंने कई मामलों में सुनवाई की और कुछ अहम फैसले भी लिए। आइए जानते हैं देश के नए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के कुछ अहम फैसले…

VVPAT के सत्यापन का मामला
देश के नए चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली खंडपीठ ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की उस याचिका पर फैसला सुनाया था, जिसमें ADR ने वोटों को पूरी तरह से VVPAT के जरिए सत्यापित कराने की मांग की थी। जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली खंड पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। उस दौरान जस्टिस खन्ना ने कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ECI द्वारा अपनाए गए सभी सुरक्षा उपायों को रिकॉर्ड में रखना चाहते हैं। मौजूदा प्रणाली त्वरित (तुरंत), बिना किसी गलती और बिना किसी गड़बड़ी के वोटों की गिनती सुनिश्चित करती है।

Electoral Bond के मामले पर भी दिया फैसला
जस्टिस खन्ना उस बेंच का भी हिस्सा थे जिन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर फैसला सुनाया था। फरवरी 2024 में जस्टिस खन्ना इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाले पांच-न्यायाधीशों वाली पीठ का हिस्सा थे। यह फैसला पारदर्शिता और भ्रष्टाचार की संभावना चिंताओं के कारण लिया गया था। जस्टिस खन्ना ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए गए दान पर दाता की गोपनीयता लागू होती है। उन्होंने कहा कि बॉन्ड को संभालने वाले बैंक अधिकारियों को दानदाताओं की पहचान के बारे में पता होता है।

आर्टिकल 370 को निरस्त करने में दी सहमति
जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 को निरस्त करने के फैसले को पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। उस वक्त जस्टिस संजीव खन्ना समेत पांच बेंचों की पीठ ने आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखा था। उनका मानना था कि जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने से भारत के संघीय ढांचे के सिद्धांतों को खतरा नहीं होगा।

RTI के मामले में दिया अहम फैसला
न्यायिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता के मुद्दे पर भी साल 2019 में जस्टिस संजीव खन्ना ने अहम फैसला सुनाया था। इस फैसले में कहा गया था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत सूचनाओं के अधीन हो सकता है। हर केस में जजों की निजता के साथ- साथ पारदर्शिता भी होनी चाहिए।

तलाक पर भी सुनाया था फैसला
जस्टिस संजीव खन्ना ने पिछले साल मई में एक तलाक के मामले में भी बड़ा फैसला सुनाया था। उस फैसले में कहा गया था कि संविधान के आर्टिकल-142 के तहत सुप्रीम कोर्ट सीधे तलाक का फैसला दे सकता है।

केजरीवाल को दी अंतरिम जमानत
इसी साल मई महीने में जस्टिस खन्ना की अगुवाई वाली पीठ ने अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करने के लिए तीन सप्ताह की जमानत दी थी। उसके दो महीने बाद, पीठ ने ईडी मामले में अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी है।

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