नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हिंसा प्रभावित मणिपुर में राहत, पुनर्वास आदि जैसे मानवीय मुद्दों को देखने के लिए तीन जजों की एक समिति का गठन करेगा। समिति की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल करेंगी। बॉम्बे हाई कोर्ट की रिटायर जज जस्टिस शालिनी जोशी और दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस आशा मेनन भी समिति का हिस्सा होंगी।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जांच के मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है, लेकिन कानून के शासन में विश्वास सुनिश्चित करने के लिए यह निर्देश देने का प्रस्ताव है कि कम से कम डिप्टी एसपी रैंक के पांच अधिकारी होंगे जिन्हें विभिन्न राज्यों से सीबीआई में लाया जाएगा। ये अधिकारी सीबीआई के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक ढांचे के चारों कोनों में भी काम करेंगे। 42 एसआईटी ऐसे मामलों को देखेंगी जो सीबीआई को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आईपीएस अधिकारी सीबीआई जांच की निगरानी करें।
मई से जारी है मणिपुर में हिंसा
3 मई को आदिवासी समाज की एक रैली के बाद मणिपुर में हिंसा भड़क गई थी। ये रैली मणिपुर में मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के अदालत के आदेश के विरोध में निकाली गई थी। इसके बाद भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हैं। 50 हजार से ज्यादा लोगों को घरों से निकलकर आश्रय स्थलों में शरण लेनी पड़ी है। मणिपुर में 5 अगस्त को पांच और लोगों की मौत के बाद 800 और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
