नई दिल्ली
देश के नए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई के मामलों में चली आ रही पुरानी व्यवस्था को बदलने का आदेश दिया। अब मामलों की तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक उल्लेख की अनुमति नहीं होगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि अब कोई मौखिक उल्लेख नहीं होगा। तत्काल सुनवाई का कारण बताते हुए ईमेल या लिखित पत्र में इसका जिक्र करना होगा। उन्होंने वकीलों से इसके लिए ईमेल या लिखित पत्र भेजने की बात कही।
अब तक कैसे होती थी अपील
आमतौर पर वकील दिन की कार्यवाही की शुरुआत में चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष अपने मामलों पर तत्काल सुनवाई के लिए उनका उल्लेख करते थे। चीफ जस्टिस ने न्यायिक सुधारों के लिए नागरिक-केंद्रित एजेंडे की रूपरेखा तैयार की है और कहा है कि न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और नागरिकों के साथ उनकी स्थिति की परवाह किए बिना समान व्यवहार करना न्यायपालिका का संवैधानिक कर्तव्य है।
शपथ लेने के बाद क्या बोले चीफ जस्टिस
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में 51वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति खन्ना को शपथ दिलाई थी। चीफ जस्टिस ने सोमवार को अपने पहले बयान में कहा न्यायपालिका शासन प्रणाली का अभिन्न, फिर भी अलग और स्वतंत्र हिस्सा है। संविधान हमें संवैधानिक संरक्षक, मौलिक अधिकारों के रक्षक और न्याय के सेवा प्रदाता होने के महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपता है। समान व्यवहार के मामले में न्याय वितरण ढांचे में सभी को सफल होने का उचित अवसर प्रदान करना आवश्यक है, चाहे उनकी स्थिति, धन या शक्ति कुछ भी हो, और ये न्यायपूर्ण और निष्पक्ष निर्णय हो। ये हमारे मूल सिद्धांतों को चिह्नित करते हैं।
किन चुनौतियों का किया जिक्र
चीफ जस्टिस ने न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया जिनमें लंबित मामलों की संख्या कम करना, मुकदमेबाजी को किफायती बनाना और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता शामिल है। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली को सभी नागरिकों की जरूरतों को पूरा करना चाहिए। न्यायमूर्ति खन्ना ने मुकदमे की अवधि को कम करने, एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने और यह सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया कि नागरिकों के लिए कानूनी प्रक्रियाएं कठिन न हों। (एजेंसी इनपुट के साथ)
