नई दिल्ली,
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित करने वाले 15 फरवरी के फैसले की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है, जो पुनर्विचार का आधार बन सके.
बेंच में जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा भी शामिल थे. वकील मैथ्यूज नेदुमपारा और अन्य द्वारा दायर की गई इस याचिका को 25 सितंबर को खारिज कर दिया गया था, और इसे शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी किया गया है.
चुनावी बॉन्ड स्कीम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अपने ऐतिहासिक 15 फरवरी के फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड स्कीम को अमान्य ठहराया था और बैंकों को इन बॉन्ड्स की जारी करने की प्रक्रिया तुरंत रोकने का निर्देश दिया था. अदालत ने कहा था कि “सरकार यह साबित करने में विफल रही है कि चुनावी योजना के क्लॉज 7(4)(1) में लागू किए गए उपाय कम से कम प्रतिबंधात्मक विकल्प हैं.”
इनके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने आयकर अधिनियम में किए गए संशोधनों और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29सी को भी असंवैधानिक करार दिया था. मुख्य न्यायाधीश ने इस फैसले के दौरान कहा कि कंपनियों को असीमित राजनीतिक दान की अनुमति देने वाला कंपनियों अधिनियम का संशोधन भी असंवैधानिक है.
एसबीआई को दिया गया था तुरंत रोक लगाने का आदेश
अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को चुनावी बॉन्ड की नई जारी करने की प्रक्रिया तुरंत रोकने का निर्देश दिया था और सभी संबंधित जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग को सौंपने को कहा था. मसलन, कोर्ट में चुनावी बॉन्ड स्कीम को लोकतांत्रिक सुधारों के लिए काम करने वाली एसोसिएशन (ADR), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), कांग्रेस नेता जया ठाकुर और स्पंदन बिस्वाल ने चुनौती दी थी.
