8.9 C
London
Sunday, March 29, 2026
Homeराष्ट्रीयमहिला आर्मी ऑफिसर को परमानेंट कमीशन देने का 'सुप्रीम' आदेश, कहा- याचिका...

महिला आर्मी ऑफिसर को परमानेंट कमीशन देने का ‘सुप्रीम’ आदेश, कहा- याचिका को वंचित करना भेदभावपूर्ण

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला आर्मी लेफ्टिनेंट कर्नल को परमानेंट कमीशन देने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने महिला आर्मी ऑफिसर के फेवर में फैसला दिया। महिला अफिसर का आरोप था कि समान स्थिति में अन्य ऑफिसरों को परमानेंट कमीशन का लाभ दिया गया था लेकिन उन्हें वंचित कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब अन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन और आयु में छूट का लाभ दिया गया, तो महिला को इससे वंचित करना भेदभावपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह उचित होगा कि महिला को परमानेंट कमीशन दिया जाए और इसके तहत उन्हें तमाम बेनिफिट दिया जाए।

कोर्ट ने क्या दिया निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि महिला को स्थायी कमीशन उसी तारीख से दिया जाए जिस तारीख से समान परिस्थितियों वाले अन्य अधिकारियों को यह लाभ दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-142 यानी अपने विशेष शक्ति का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया है कि महिला अधिकारी को परमानेंट कमीशन दिया जाए और उन्हें इसके लिए तमाम बेनिफिट दिया जाए। याचिकाकर्ता को सीनियरिटी, प्रोमोशन और वित्तीय लाभ अन्य लाभ दिए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को चार हफ्ते में लागू करने को कहा है।

क्या थी याचिका?
मामले में दाखिल याचिका में कहा गया था कि 2008 में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी के रूप में आर्मी डेंटल कॉर्प्स में शामिल हुईं याचिकाकर्ता को स्थायी कमीशन पाने के तीन अवसर मिलने चाहिए थे। हालांकि, 2013 में नीति में संशोधन के बाद, उन्हें तीसरा मौका नहीं दिया गया, जबकि समान परिस्थितियों में रहे अन्य अधिकारियों को यह अवसर प्रदान किया गया। आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी), रीजनल बेंच लखनई ने उनके केस पर विचार नहीं किया। इसके बाद याचिकाकर्ता ऑफिसर ने सशस्त्र बल अधिकरण (AFT) के 5 जनवरी 2022 के आदेश को चुनौती दी। एएफटी जिसमें उनके मामले पर विचार नहीं किया गया था। अन्य आवेदकों को एएफटी ने एक बार के लिए आयु में छूट देकर राहत दी, लेकिन मुख्य याचिका में किसी कारण पक्षकार नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता को यह लाभ नहीं मिला।

बेंच ने एएफटी के आदेश को किया खारिज
जस्टिस .आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने एएफटी के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि जब अन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन और आयु में छूट का लाभ दिया गया, तो याचिकाकर्ता को इससे वंचित करना भेदभावपूर्ण है। शीर्ष अदालत ने यह साफ किाय कि यह तर्क कि याचिकाकर्ता ने मूल मुकदमे में भाग नहीं लिया, उन्हें लाभ से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने इसके लिए अमृतलाल बेरी बनाम कलेक्टर ऑफ सेंट्रल एक्साइज और के.आई. शेफर्ड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसलों का संदर्भ दिया। इन मामलों में यह व्यवस्था दी गई है कि अगर कोर्ट ने किसी मामले में फैसला दिया है तो समान स्थिति व परिस्थितियों में रहने वाले लोगों को खुद ब खुद यह लाभ मिलना चाहिए उन्हें इस लाभ से इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया।

Latest articles

प्रशिक्षण से व्यक्तित्व का उत्कर्ष, राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

प्रशिक्षण अभियान सशक्त भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी है: प्रदेश अध्यक्ष श्री खंडेलवाल भोपाल:...

भोपाल में सूखे कचरे से बनेगा कोयला, आदमपुर छावनी में 220 करोड़ का चारकोल प्लांट शुरू

भोपाल राजधानी में अब सूखे कचरे से कोयला तैयार किया जाएगा। इसके लिए आदमपुर छावनी...

भंडारा खाकर लौट रहे युवक को बस ने कुचला, मौके पर मौत

भोपाल राजधानी के एमपी नगर इलाके में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। गायत्री...

एम्स भोपाल में जल्द शुरू होगी लंग ट्रांसप्लांट सुविधा, मरीजों को दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा

भोपाल एम्स भोपाल में जल्द ही फेफड़ा प्रत्यारोपण (लंग ट्रांसप्लांट) की सुविधा शुरू होने जा...

More like this

1 अप्रैल से जेब पर बढ़ेगा बोझ: नेशनल हाईवे पर सफर होगा 5 से 10% तक महंगा

आने वाली 1 अप्रैल से नेशनल हाईवे पर सफर करना आपकी जेब पर भारी...

रामनवमी पर प्रदेशभर में धार्मिक आयोजन, मंदिरों में विशेष पूजा और भंडारे

भोपाल रामनवमी के पावन अवसर पर मप्र के विभिन्न शहरों में श्रद्धा और उत्साह के...

राजधानी में दो दिन में छह नाबालिग किशोरियां लापता, पुलिस ने शुरू की तलाश

भोपाल राजधानी में दो दिनों के भीतर शहर के अलग-अलग इलाकों से आधा दर्जन नाबालिग...