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कोर्ट के तीन जजों की कमिटी ने सौंपी रिपोर्ट, जस्टिस वर्मा के आवास से मिले थे अधजले नोट

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नई दिल्ली:

जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास परिसर के स्टोर में कथित तौर पर अधजले नोट की बरामदगी के आरोपों की आंतरिक जांच करने वाली तीन जजों की समिति ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को रिपोर्ट सौंप दी है। जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित तौर पर नकद राशि मिलने के आरोपों की आंतरिक जांच कर रही तीन-सदस्यीय समिति ने 4 मई को चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

तीन-सदस्यीय समिति ने सौपीं रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक जस्टिस शील नागू (मुख्य न्यायाधीश, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय), जस्टिस जी.एस. संधावालिया (मुख्य न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय) और जस्टिस अनु शिवरामन (न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय) की तीन-सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट दी है। यह समिति 22 मार्च को तब गठित की गई थी जब यह खबर सामने आई थी कि दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के बाहरी परिसर में स्थित स्टोररूम से, आग बुझाने की कार्यवाही के दौरान, भारी मात्रा में नकद राशि का कथित रूप से पता चला। उस समय वे दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। इस घटना के बाद उन्हें उनके मूल हाई कोर्ट यानी इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।

इस मामले में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस .के. उपाध्याय की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया कि तीन जजों की कमिटी आंतरिक जांच करेगी। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट में कहा गया था कि इस पूरे मामले की गहन जांच की आवश्यकता है।

क्या है यह पूरा मामला?
14 मार्च को जस्टिस वर्मा के घर पर लगी आग बुझाने की कार्रवाई के दौरान की कुछ तस्वीरें सामने आई थी जिसमें दिखाया गया था कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के परिसर में स्थित स्टोर में कथित तौर पर नोटो की गड्डियां जली हुई थी। 22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने जांच के लिए तीन जजों की कमिटी का गठन किया। साथ ही चीफ जस्टिस खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा था कि वो इस दौरान जस्टिस वर्मा को कोई ज्यूडिशियल कार्य न सौंपे। बाद में जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया। इससे पहले जस्टिस वर्मा के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की ओर से रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई थी जिसके बाद उसका परीक्षण कर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की ओर से उक्त कमिटी का गठन किया गया था।

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