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‘जो कहते हैं वो करते नहीं…’, आर्मी चीफ ने बताई चीनियों की फितरत, निपटने की समझाई स्‍ट्रैटेजी

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नई दिल्ली

चीन दिनोंदिन आक्रामक होता जा रहा है। उसकी विस्‍तारवादी सोच ने पूरी दुनिया की नाक में दम कर रखा है। भारत तो उसकी इस आक्रामकता से सीधे दो-चार है। एक सबसे बड़ी दिक्‍कत चीन को समझने की है। वह अपनी बात पर नहीं टिकता है। आखिर इस चुनौती से कैसे निपटा जाए? आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे ने इसका जवाब दिया है। उन्‍होंने कहा है कि हर कोई एक बात जानता है। चीनी जो कहते हैं, उससे काफी अलग करते हैं। यह उनके नेचर और कैरेक्‍टर का हिस्‍सा है। उनके मुताबिक, चीन से निपटने के लिए एक ही स्‍ट्रैटेजी है। चीन के कहे के बजाय उसकी हरकतों पर नजर रखना होगा।

भारत और चीन के बीच काफी समय से सीमा विवाद है। गलवान में हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्‍तों में कड़वाहट और बढ़ी है। तभी से चीन से लगी सीमा पर तनाव भी है। भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर सीमा विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। वहीं, भारत इसका विरोध करता है। बीते कुछ सालों में चीन की आक्रामकता में इजाफा हुआ है। इसे लेकर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाया हुआ है।

चीन के बारे में मनोज पांडे ने क्‍या कहा?
चीन के रवैये पर शनिवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा कि हम सभी एक बात जानते हैं। चीनी जो कहते हैं उससे बिल्‍कुल अलग करते हैं। यह उनके नेचर और कैरेक्‍टर का हिस्‍सा है। हमें उनकी लिखी-बोली गई चीजों के बजाय गतिविधियों पर नजर रखनी होगी। थलसेना प्रमुख ने चीन से लगे क्षेत्र में सीमा गतिरोध लंबे समय से जारी रहने के बीच कहा कि पूर्वी लद्दाख में ‘स्थिति स्थिर, लेकिन अप्रत्याशित’ है।

जनरल पांडे ने एक थिंक टैंक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत शेष मुद्दों के समाधान के लिए चीन के साथ उच्च स्तर की सैन्य वार्ता के अगले दौर को लेकर आशावादी है। वह बोले, ‘हम 17वें दौर की वार्ता की तारीख पर विचार कर रहे हैं।’ जनरल पांडे विचार समूह ‘चाणक्या डायलॉग्स’ को संबोधित कर रहे थे। सीमावर्ती इलाकों में चीन के बुनियादी ढांचा विकसित करने के विषय पर थलसेना प्रमुख ने कहा कि यह लगातार हो रहा है। क्षेत्र में भारतीय थलसेना की तैयारियों के बारे में उन्होंने कहा, ‘सर्दियों के मौसम के अनुकूल तैयारी जारी है।’ जनरल पांडे ने यह भी कहा कि अपने हितों की सुरक्षा के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हमारे कार्यों को बहुत सावधानीपूर्वक समायोजित करने की जरूरत है।

चीन पर हाल में आई है एक र‍िपोर्ट
सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब बीते रोज एक अंतरराष्‍ट्रीय अध्‍ययन में चीन की फितरत से पर्दा उठाया गया है। इस स्‍टडी के मुताबिक, अक्साई चिन क्षेत्र में चीनी अतिक्रमण आकस्मिक घटनाएं नहीं हैं। इसके बजाय ये विवादित सीमा क्षेत्र पर स्थायी नियंत्रण पाने की सुनियोजित ‘विस्तारवादी रणनीति’ का हिस्सा हैं। भारत सरकार के 2019 के आंकड़ों के अनुसार, चीन की सेना ने 2016 से 2018 के बीच 1,025 बार भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की। तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने नवंबर 2019 में लोकसभा को बताया था कि चीन की सेना ने 2016 में 273 बार घुसपैठ की। ये 2017 में बढ़कर 426 हो गईं। 2018 में इस तरह की घटनाओं की संख्या 326 रही।

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