नई दिल्ली
यूपी के झांसी में शुक्रवार रात दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में आग लगने से 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई। इस तरह का ये पहला हादसा नहीं है, देशभर में पहले भी जिंदगी देने अस्पताल नवजात बच्चों के लिए श्मशान बन चुके हैं। दिल्ली से लेकर यूपी और गुजरात तक ऐसे हादसे होते रहे हैं। बावजूद इसके अस्पतालों ने कोई सबक नहीं लिया। इसी का नतीजा है कि आज भी इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, वो भी सरकारी मेडिकल कॉलेज से। आज हम ऐसे ही कुछ हादसों के बारे में बता रहे हैं।
गोरखपुर में हुई थी कई बच्चों की मौत
यूपी के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने की वजह से कई बच्चों की मौत हुई थी। आंकड़े के मुताबिक, 48 घंटे में 30 बच्चों की मौत हो गई। पूरी घटना में 5 दिनों के भीतर 60 बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी। ऑक्सीजन सप्लाई में यह समस्या कथित तौर पर अस्पताल के बकाया भुगतान न करने के कारण हुई थी, जिससे सिलेंडर आपूर्ति रोक दी गई। इस घटना ने देशभर में गहरा आक्रोश पैदा किया था और सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की भारी आलोचना हुई।
दिल्ली के चाइल्ड केयर सेंटर में आग लगने से 7 नवजात बच्चों की मौत
राजधानी दिल्ली मे 26 मई 2024 को विवेक विहार स्थित बेबी केयर हॉस्पिटल में भयंकर आग लगने से 7 नवजात बच्चों की मौत हो गई। यह घटना देर रात हुई और आग ने अस्पताल के महत्वपूर्ण हिस्सों को चपेट में ले लिया। उस समय अस्पताल में मौजूद स्टाफ और डॉक्टरों की लापरवाही भी सामने आई, जिसके चलते अस्पताल के मालिक और एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया। इस हादसे में 6 अन्य बच्चों को बचाया गया और उन्हें दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल में हुई थी कई बच्चों की मौत
8 नवंबर 2021 को भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर की कमला नेहरू बाल चिकित्सालय में भीषण आग लगने से चार नवजात बच्चों की मौत हो गई। यह आग अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित पीडियाट्रिक वार्ड में लगी, जहां 40 बच्चे भर्ती थे। घटना में बाकी 36 बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी।
