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दिल्ली MCD में एल्डरमैन नियुक्त करने का अधिकार किसके पास? सुप्रीम कोर्ट सोमवार को करेगा फैसला

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाने वाला है। दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल के एक फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दरअसल, उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की सलाह के बिना ही MCD में ‘एल्डरमैन’ नियुक्त कर दिए थे। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जे बी पारदीवाला की पीठ ने की थी। सुनवाई पूरी होने के बाद 17 मई को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इस मामले में फैसला 5 अगस्त को सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, जस्टिस पी एस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ फैसला सुनाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में क्या कहा था?
पिछले साल 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उपराज्यपाल को एमसीडी में पार्षदों को नामित करने का अधिकार देने का मतलब होगा कि वह निर्वाचित नगर निकाय को अस्थिर कर सकते हैं। एमसीडी में 250 निर्वाचित और 10 नामित सदस्य हैं। दिसंबर 2022 में आम आदमी पार्टी ने नगर निगम चुनाव में 134 वार्ड में जीत के साथ एमसीडी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 15 साल के शासन को समाप्त कर दिया था। भाजपा ने 104 सीट जीतीं और कांग्रेस नौ सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ‘क्या एमसीडी में विशेषज्ञ लोगों को नामित करना केंद्र के लिए इतनी चिंता का विषय है? वास्तव में, उपराज्यपाल को यह शक्ति देने का मतलब यह होगा कि वह लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नगर समितियों को अस्थिर कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास (एल्डरमैन) मतदान का अधिकार भी होगा।’

दिल्ली सरकार के वकील ने क्या दलील दी थी?
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी थी कि दिल्ली सरकार को एमसीडी में लोगों को नामित करने के लिए कोई अलग से अधिकार नहीं दिए गए हैं और पिछले 30 वर्षों से सरकार की सहायता एवं सलाह पर उपराज्यपाल द्वारा ‘एल्डरमैन’ को नामित करने की परंपरा का पालन किया जाता रहा है। तत्कालीन अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से पेश होकर दलील दी थी कि सिर्फ इसलिए कि कोई परंपरा 30 वर्षों से चली आ रही है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह सही है।

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