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‘आपके बिना तो हम जज समय की रेत में शून्य होंगे…’, जानें CJI चंद्रचूड़ ने क्यों की वकीलों की तारीफ

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नई दिल्ली

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने मंगलवार को नागरिकों को न्याय तक पहुंच आसान करने पर जोर देते हुए कहा कि अदालत व्यक्तियों को उनके जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षित लोकतांत्रिक जगह देती है। उन्होंने वकीलों की तारीफ करते हुए कहा कि उनके बिना, उनकी निडरता के बिना जज तो समय की रेत में शून्य जैसे होंगे।

सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन (एससीबीए) की तरफ से आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘हमारे लिए इस तथ्य को पहचानना महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट बार देश की अग्रणी बार के रूप में कानून के शासन की रक्षा के लिए खड़ा है।’ उन्होंने वकीलों का जिक्र करते हुए कहा, ‘आपके (वकीलों) के बिना, आपकी निडरता के बिना, आपकी स्वतंत्रता के बिना, हम न्यायाधीश वास्तव में समय की रेत में सिफर होंगे।’

सीजेआई ने कहा, ‘जब मुझे बार के किसी सदस्य से कभी-कभी किसी मामले को उसी दिन तुरंत उठाने का अनुरोध मिलता है, तब भी मैं इसे बहुत ध्यान से सुनता हूं और जल्द से जल्द एक पीठ गठित करता हूं, क्योंकि हमारे सिस्टम का असली मकसद हमारे नागरिकों को न्याय तक पहुंच प्रदान करना है।’

उन्होंने यह भी कहा, ‘हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने हाशिये पर पड़े और वंचितों को आधिपत्य, सामाजिक संरचना के प्रभाव के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए एक संवैधानिक स्थान दिया। इसने न्याय दिलाने के लिए शासन की संस्थाओं को लोगों की पीड़ाओं पर सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देने का आदेश दिया।’उन्होंने कहा कि पिछले 76 वर्षों में हमें अहसास हुआ है कि प्रत्येक संस्था ने हमारे राष्ट्र की आत्मा को मजबूत करने में योगदान दिया है।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है कि हम यह पहचानें कि राष्ट्र की सभी संस्थाएं, कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका राष्ट्र निर्माण के सामान्य कार्य से जुड़ी हैं।’उन्होंने कहा, ‘और इस अवसर को हमारे सामूहिक लक्ष्यों और संस्थागत आकांक्षाओं को पुन: व्यवस्थित करने के अवसर के रूप में काम करना चाहिए।’

सीजेआई ने आगे कहा, ‘हमारा संविधान यह सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका की परिकल्पना करता है कि शासन की संस्थाएं परिभाषित संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करती हैं।’चंद्रचूड़ ने कहा, ‘इसके अलावा, अदालत व्यक्तियों को उनके जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए सुरक्षित लोकतांत्रिक स्थान प्रदान करती है। सुप्रीम कोर्ट विशेष रूप से, न्याय तक पहुंच बढ़ाने और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले संस्थागत शासन का अगुआ रहा है।’

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