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Wednesday, June 24, 2026
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वक्फ बोर्ड बिल के जरिए कैसे बीजेपी ने आगे बढ़ाया अपना एजेंडा? समझिए पूरा प्लान

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नई दिल्ली

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश करते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ चंद लोगों (चंद मुस्लिमों) की आवाज बुलंद कर रहे हैं और इन्हें बोहरा, अहमदिया (यानी मुस्लिम में पिछड़े तबके) का ख्याल नहीं है, उससे साफ है कि बीजेपी ने इस बिल के जरिए एक बार फिर मुस्लिम समुदाय में पिछड़े तबके को साथ लाने की कोशिश की है। रिजीजू लगातार सदन को यह बताते रहे कि कैसे यह बिल गरीब मुस्लिमों और मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के हित में हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में सुधार गरीब मुस्लिमों और मुस्लिम महिलाओं के लिए जरूरी है। नहीं तो मुस्लिम समुदाय में एक कम्युनिटी डोमिनेट करके छोटे लोगों को कुचलते रहेंगे।

बीजेपी का क्या प्लान?
केंद्रीय मंत्री का जोर इस बात पर रहा कि मुस्लिम समुदाय में जो पिछड़ा वर्ग है वह वक्फ बोर्ड की मनमानी से परेशान है और पारदर्शिता आने से मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्ग को फायदा होगा। उन्होंने सबका साथ सबका विकास का भी जिक्र किया। हालांकि लोकसभा चुनाव के वक्त बीजेपी के नेताओं की तरफ से कई ऐसे बयान आए जिसके आधार पर विपक्ष को फिर बीजेपी को मुस्लिम विरोधी कहने का मौका मिला। हालांकि चुनाव के बाद अब फिर बीजेपी अपने चुनाव से पहले वाले अजेंडे पर काम करती दिख रही है। लोकसभा चुनाव से पहले भी और एनडीए के इससे पहले वाले कार्यकाल में भी बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्ग और महिलाओं पर फोकस कर अपने पक्ष में सोशल इंजीनियरिंग की कोशिशें की थी। बीजेपी नेता मानते हैं कि तीन तलाक को लेकर कानून का फायदा मिला और बीजेपी को मुस्लिम महिलाओं का भी साथ मिला। वक्फ बोर्ड संशोधन बिल के जरिए भी बीजेपी मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्ग जैसे बोहरा, अहमदिया आदि पर ही फोकस कर रही है जिसका केंद्रीय मंत्री ने सदन में जिक्र भी किया।

पसमांदा मुसलमानों के हक में क्या बोले पीएम मोदी?
लोकसभा चुनाव से पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिमों में पिछड़े वर्ग का जिक्र करते रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कहा था कि वोट बैंक की राजनीति करने वालों ने पसमांदा मुसलमानों का जीना मुश्किल कर रखा है। वे तबाह हो गए, उन्हें कोई फायदा नहीं मिला है। उनके ही धर्म के एक वर्ग ने पसमांदा मुसलमानों का इतना शोषण किया है, लेकिन देश में इस पर चर्चा नहीं हुई। पसमांदा को आज भी बराबरी का हक नहीं मिलता और उन्हें नीचा और अछूत समझा जाता है। तब पीएम ने पसमांदा मुसलमानों की जातियां भी गिनाईं। पीएम ने कहा कि इस भेदभाव का नुकसान पसमांदा की कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ा। लेकिन बीजेपी सबका विकास की भावना से काम कर रही है।

बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को समझिए
बीजेपी यूं ही पसमांदा या मुस्लिमों के पिछड़े वर्ग की बात नहीं कर रही है। मुस्लिम समाज के भीतर पसमांदा समाज को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से पिछड़ा माना जाता है। ये मुस्लिम समाज का ओबीसी वर्ग है। इसमें कुरैशी, मंसूरी, अंसारी, सलमानी, सिद्दीकी सहित 41 अलग अलग जातियां आती है। बीजेपी पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं और यह भी तथ्य है कि बीजेपी के खिलाफ अगर किसी भी चुनाव में मुस्लिम एकजुट होकर वोट दें तो बीजेपी की मुश्किल बढ़ जाती है। बीजेपी ने इससे पार पाने के लिए सोशल इंजीनियरिंग शुरू की थी। इस बिल के जरिए भी बीजेपी इसी सोशल इंजीनियरिंग को आगे बढ़ा रही है। मुस्लिमों में करीब 80 पर्सेंट पसमांदा यानी पिछड़े वर्ग के हैं। बीजेपी इन्हीं को फोकस कर रही है। इसी साल महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

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