नई दिल्ली
क्या सहयोगी दलों को नई सरकार में शामिल करने का फॉर्म्युला तैयार हो गया है? नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की तीसरी सरकार 9 जून, रविवार को शपथ लेगी। इससे पहले मंत्रिमंडल गठन के फॉर्म्युले पर तेजी से काम चल रहा है। सूत्रों की मानें तो एनडीए में बीजेपी के सहयोगी दलों की तरफ से 4 अनुपात 1 का सूत्र प्रस्तावित किया गया है। सहयोगी दल चाहते हैं कि उन्हें उनके प्रत्येक चार सांसद पर एक मंत्री का पद मिले। अगर यह फॉर्म्युला ही लागू हुआ तो सहयोगी दलों के 25% सांसद मंत्री बन जाएंगे।
टीडीपी के चार, जेडीयू के तीन मंत्री?
आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) एनडीए में बीजेपी के बाद सबसे बड़े हिस्सेदार के रूप में उभरी है। चंद्र बाबू नायडू की इस पार्टी के 16 सांसद हैं। उनके बाद नंबर नीतीश कुमार का है जिनकी पार्टी जेडीयू के 12 सांसद बने हैं। बिहार में जेडीयू और बीजेपी की गठबंधन सरकार चल रही है जबकि आंध्र प्रदेश में भी टीडीपी, सत्ताधारी दल वाईएसआरसीपी को परास्त कर सरकार बनाने जा रही है।
सूत्रों से आ रही खबरों पर यकीन करें तो 16 सांसदों वाली टीडीपी के केंद्र सरकार में चार जबकि 12 सांसदों वाले जेडीयू के 4 मंत्री हो जाएंगे। इसी फॉर्म्युले से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना और बिहार में चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी(रामविलास) के दो-दो सांसद मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
इस बार बैशाखी पर टिकी सरकार
ध्यान रहे कि 4 जून को आए लोकसभा चुनाव परिणाम में त्रिशंकु संसद का जनमत आया है। एक दशक बाद किसी पार्टी को अकेले दम पर बहुमत हासिल नहीं हुआ है। बीजेपी 240 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी और कुल 293 सीटों के साथ उसकी अगुवाई वाला एनडीए बड़ा गठबंधन बनकर उभरे हैं। दूसरी तरफ, विपक्ष के इंडिया गठबंधन को 243 सीटें मिली हैं जिनमें कांग्रेस की अकेले 99 सीटें शामिल हैं। इससे पहले 2014 और 2019 में बीजेपी ने क्रमशः 282 और 303 सीटों के साथ अकेले दम पर बहुमत का आंकड़ा पार किया था।
