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ऑपरेशन सिंदूर का सुंदरकांड कनेक्शन… रक्षामंत्री ने बताया कैसे हनुमान जी बने प्रेरणा

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नई दिल्ली ,

भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर जोरदार कार्रवाई की. पहलगाम में पर्यटकों पर हुए हमले का बदला लेते हुए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया और पाकिस्तान स्थित नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया. इस जवाबी कार्रवाई से खुश भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘हमने हनुमान जी के उस आदर्श का पालन किया है, जो उन्होंने अशोक वाटिका उजाड़ते समय किया था- जिन मोहि मारा, तिन मोहि मारे. यानी हमने केवल उन्हीं को मारा जिन्होंने हमारे मासूमों को मारा. राजनाथ सिंह ने रामचरितमानस की चौपाई का सहारा लेते हुए भारत की सोच को स्पष्ट किया. आइए आपको सुंदरकांड की इस पंक्ति और इसके पीछे की कहानी विस्तार से बताते हैं.

सुंदरकाण्ड की चौपाई का अर्थ
चौपाई- जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे। तेहि पर बांधेउं तनयं तुम्हारे॥
मोहि न कछु बांधे कइ लाजा। कीन्ह चहउं निज प्रभु कर काजा॥
अर्थ- जिन्होंने मुझे मारा, उनको मैंने भी मारा. तुम्हारे पुत्र ने मुझको बांध लिया, मैं अपने बांधे जाने से लज्जित नहीं हूं. मैं तो बस अपने प्रभु का कार्य कर रहा हूं॥

जब मेघनाद के ब्रह्मास्त्र से बंधक हुए हनुमान
रामायण में रावण द्वारा सीता का हरण किए जाने के बाद हनुमान जी उनकी खोज में लंका पहुंचे. लंका में उन्होंने देवी सीता को काफी ढूंढा, लेकिन सफलता नहीं मिली. हनुमान थककर बैठ गए और निराश हो गए. तब विभीषण ने उन्हें देवी सीता के बारे में बताया. इसके बाद हनुमानजी अशोक वाटिका पहुंचे और उन्होंने भगवान श्रीराम का संदेश देवी सीता को सुनाया.

देवी सीता तक प्रभु राम का संदेश पहुंचाने के बाद जब हनुमानजी को भूख लगी तो वे अशोका वाटिका के फल तोड़कर खाने लगे. इतने विशाल वानर को देख पहरेदारों ने इसकी सूचना रावण को दी. रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को हनुमानजी को बंदी बनाने के लिए भेजा, लेकिन हनुमानजी ने उसका वध कर दिया.

उसके बाद रावण का सबसे पराक्रमी पुत्र मेघनाद हनुमानजी को पकड़ने आया. उसने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया. वरदान के कारण ब्रह्मास्त्र हनुमानजी का अहित नहीं कर सकता था, लेकिन ब्रह्मा का अस्त्र होने के कारण हनुमानजी स्वयं उसके बंधनों में बंध गए. जब हनुमान जी रावण के दरबार में पहुंचे तो लंकापति ने हनुमान जी से पूछा कि तुमने मेरे बेटे अक्षय कुमार और सैनिकों को क्यों मारा, इस पर हनुमान जी ने कहा, ‘जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे’ यानी मैंने उन्हीं को मारा, जिन्होंने मुझे मारा.

हनुमान जी ने रावण से कहा कि हर व्यक्ति को अपनी देह प्यारी है. बुराई के रास्ते पर चलने वाले तुम्हारे अनुचरों ने मुझे मारा है. इसलिए जिन्होंने मुझे मारा, उनको मैंने भी मारा. इसमें मेरा कोई अपराध नहीं बनता है. यह तो क्रिया की प्रतिक्रिया का प्राकृतिक सिद्धांत है. जिंदा कौम की देह सिर्फ उसका शरीर नहीं होता है. शरीर के साथ आत्मा मिलकर उसकी देह को बनाते हैं.

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