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ये जुर्म का इकबालिया बयान है… केजरीवाल के इस्तीफे के ऐलान पर बीजेपी का निशाना

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नई दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के ऐलान को लेकर बीजेपी ने निशाना साधा है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि जेल से बाहर आकर ही केजरीवाल ने इस्तीफे की बात क्यों की? उनके इस्तीफे का ऐलान जुर्म का इकबालिया बयान है। ये पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो दो मंत्रियों के साथ अपनी ही जेल में रहे हैं। इसके बाद भी उन्होंने पद नहीं छोड़ा। उन्होंने नैतिकता का ध्यान नहीं रखा। इसके साथ ही बीजेपी ने पूछा आखिर केजरीवाल को इस्तीफे के लिए 48 घंटे का समय क्यों चाहिए? आखिर इसके पीछे का क्या राज है?

‘अपनी ही सरकार के नियम तोड़ते हैं केजरीवाल’
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, ‘भारत की राजनीति की नई नवेली पार्टी के स्वघोषित कट्टर ईमानदार जेल से बाहर आकर स्वागत करा रहे हैं। ये पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो दो मंत्रियों के साथ अपनी ही जेल में रहे हैं। इसके बाद भी उन्होंने पद नहीं छोड़ा। उन्होंने नैतिकता का ध्यान नहीं रखा। अपनी जेल से बाहर आकर आतिशबाजी हुई। उनकी ही सरकार ने आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया है और उनके ही मुख्यमंत्री ने नियमों का उल्लघंन किया।’

‘AAP ने भगत सिंह का अपमान किया’
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘एक भ्रष्टाचार का आरोपी गुनहगार वीर भगत सिंह के नाम का इस्तेमाल कर रहा है, इससे ज्यादा पीड़ादायक क्या होगा? भ्रष्टाचार के आरोपी मुख्यमंत्री ने शहीद ए आजम भगत सिंह की प्रतिष्ठा को धूल में मिलाने का काम किया है।’

‘इस्तीफे के लिए दो दिन क्यों चाहिए?’
बीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘मैं पूछना चाहता हूं कि आपने जेल में तो इस्तीफे की बात तो की नहीं। बाहर आकर इस्तीफे की बात क्यों की। उसमें भी आपको 48 घंटे का समय चाहिए। आखिर इन दो दिनों में क्या-क्या सेटल करना है। आप देश के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फाइल साइन करने, कार्यालय जाने से रोक लगाई है। जब कोई सरकारी काम नहीं करना तो फिर क्या राज है जिसके लिए 48 घंटे की मांग की जा रही है। वहीं केजरीवाल ने इस्तीफे की बात की, तो हम कह सकते हैं कि ये उनके जुर्म का इकबालिया बयान है। आपने मान लिया कि आप पर जो आरोप थे वो इस लायक हैं कि आप पद पर नहीं रह सकते।’

आपका बहुमत तो चुनाव कराने की मांग क्यों?
एक और संदेह पैदा होता है। आपने कहा कि चुनाव जल्दी कराएं जाएं। ये जल्दी चुनाव कराने और इस्तीफे की आवश्यकता किस विवशता के साथ है। क्या पार्टी में सब ठीक नहीं है। दिल्ली की जनता के मन में सवाल है कि आपका प्रचंड बहुमत है आप मुख्यमंत्री हैं, तो चुनाव कराने की मांग क्यों हो रही है। आप कैबिनेट की बैठक बुलाइए और विधानसभा भंग करिए, ताकि चुनाव हों। केजरीवाल की चुनाव जल्दी कराने की मांग दर्शाती है कि उनका आचरण, व्यवहार और वाणी तीनों इस संदेह के घेरे में हैं।

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