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Saturday, May 2, 2026
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पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों को नहीं दिया जाएगा शहीद का दर्जा, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

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चंडीगढ़

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए 26 व्यक्तियों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने मंगलवार को जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि नीतियां बनाना सरकार का काम है। कोर्ट पॉलिसी नहीं बना सकता। याचिका में जिस स्थान पर इन लोगों को आतंकियों ने बेरहमी से मार डाला था, उसका नाम- ‘शहीद हिंदू घाटी टूरिस्ट प्लेस’ रखने की मांग की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह समय ऐसे मुद्दों का नहीं है।

लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की भी मौत हुई थी
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में करनाल के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की भी मौत हुई थी। वह अपनी पत्नी हिमांशी के साथ पहलगाम घूमने गए थे। इस घटना के बाद दो मई को हाईकोर्ट के एडवोकेट आयुष आहूजा ने याचिका लगाई थी। याचिका में उन्होंने केंद्र और प्रधानमंत्री कार्यालय को निर्देश देने की मांग की थी, कि मरने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाए। मरने वालों के नाम सोने के अक्षरों में लिखे जाएं और उनकी मूर्तियां लगाई जाएं।

6 मई को फैसला रख लिया गया था सुरक्षित
केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने मंगलवार को कहा था कि याचिकाकर्ता को पता नहीं है कि भारत सरकार क्या कर रही है। गृह मंत्री उसी शाम श्रीनगर पहुंच गए। हम दूसरे देश के साथ युद्ध के कगार पर हैं। यह ऐसे मुद्दों को उठाने का समय नहीं है, हम अन्य चीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं। 6 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

‘धर्म के नाम पर आतंकवादियों ने सिर पर गोली मार दी’
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल की बैच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट नई नीतियां नहीं बना सकता। ये काम सरकार का है। बेंच ने याचिकाकर्ता को यह भी कहा कि वह अपनी मांग या शिकायत उचित अधिकारी या अथॉरिटी को लिखकर दे। इसके बाद 30 दिन के अंदर उसकी मांग पर विचार किया जाएगा। चीफ जस्टिस शील नागू ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्हें शहीद घोषित करना अनुच्छेद 226 के अंतर्गत आता है? अगर ऐसा है तो उदाहरण देकर बताइये। क्या कोर्ट ऐसा फैसला ले सकती है। यह फैसला तो सरकार को लेना चाहिए, क्योंकि यह उनका काम है। इसका जवाब देते हुए याचिकाकर्ता एडवोकेट आयुष आहूजा ने कहा कि निर्दोष पर्यटकों को धर्म के नाम पर आतंकवादियों ने सिर पर गोली मार दी।

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